“आजादी के 79 साल बाद भी ‘सम्मान’ अधूरा, ध्वजारोहण समारोह में प्रोटोकॉल टूटा, विधायक ब्यास कश्यप नाराज़, प्रशासन घिरा सवालों में”
“तिरंगे के सम्मान में कमी नहीं, पर जनप्रतिनिधि के सम्मान में कोताही, जिला स्तरीय समारोह में सत्ता की छाया, शिष्टाचार पस्त”
जांजगीर-चांपा। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित जिला स्तरीय ध्वजारोहण कार्यक्रम में इस बार जश्न से ज्यादा प्रोटोकॉल विवाद चर्चा में रहा। जिले के निर्वाचित विधायक ब्यास कश्यप को उचित स्थान और सम्मान न मिलने पर राजनीतिक हलकों से लेकर आम जनता तक में नाराज़गी फैल गई।
कार्यक्रम स्थल पर पहले भी ‘पत्रकार दीर्घा’ और VIP सीटों पर कब्जे के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन इस बार हालात और बिगड़ गए। जिला प्रशासन ने पदनाम के अनुसार VIP कुर्सियों पर नाम-पट्टी लगाकर सीटें सुरक्षित करने की व्यवस्था की थी, लेकिन समारोह शुरू होते-होते यह व्यवस्था बिखर गई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सांसद कमलेश जांगड़े की सीट भी यहां सुरक्षित रखी गई, जबकि पूर्व में ही तय था कि वे सक्ती जिला मुख्यालय में ध्वजारोहण करेंगी। इस कदम ने विवाद को और हवा दे दी। लाल किला प्रतीक के पर्दे को लेकर पहले से जारी नाराज़गी के बीच यह नया विवाद जिले की छवि पर और दाग लगा गया।
विधायक का रोष, “यह लोकतंत्र के सम्मान पर आघात”
विधायक ब्यास कश्यप ने मंच से उतरने के बाद मीडिया से साफ कहा — “ध्वजारोहण तक मैं तिरंगे का सम्मान करते हुए वहां मौजूद रहा, लेकिन उसके बाद कार्यक्रम स्थल छोड़ दिया, क्योंकि वहां घुसपैठियों का जमावड़ा था। न पद, न जनादेश, फिर भी VIP सीटों पर कब्जा, यह लोकतंत्र के सम्मान पर आघात है। ऐसे लोगों का संरक्षण करने वाले अधिकारी भी बराबर के दोषी हैं। चुने हुए जनप्रतिनिधि का यह घोर अपमान है।”
कश्यप ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि प्रोटोकॉल का पालन सिर्फ सत्ता पक्ष के लिए नहीं, बल्कि सभी जनप्रतिनिधियों के लिए होना चाहिए। विपक्ष को नीचा दिखाने की प्रवृत्ति आने वाले समय में किसी के लिए भी घातक साबित हो सकती है।
स्थानीय प्रतिक्रिया, “79 साल बाद भी अधूरी आज़ादी”
घटना के बाद आमंत्रित अतिथियों और स्थानीय लोगों ने भी नाराज़गी जताई। उनका कहना था कि आजादी के 79 साल बाद भी अगर ऐसे मौके पर प्रोटोकॉल और शिष्टाचार का पालन नहीं हो पा रहा, तो यह हमारे लोकतंत्र और प्रशासनिक जिम्मेदारी, दोनों पर सवाल है।
प्रोटोकॉल का मतलब क्या?
स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसरों पर जिला स्तर पर तय ‘प्रोटोकॉल’ यानी औपचारिक नियम होते हैं, जिनमें मंच पर और VIP दीर्घा में बैठने की प्राथमिकता तय रहती है। इसमें जिले के निर्वाचित जनप्रतिनिधि, सांसद, विधायक, मंत्री, पूर्व सैनिक, प्रशासनिक अधिकारी और विशिष्ट अतिथि क्रमवार बैठते हैं।
लेकिन जांजगीर-चांपा में इस बार हालात उलटे दिखे। विपक्षी दल के निर्वाचित विधायक ब्यास कश्यप को ना सिर्फ़ VIP सीट से वंचित रखा गया, बल्कि मंच और दीर्घा में ऐसे लोग बैठ गए जो न पद पर हैं, न जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यह न केवल प्रोटोकॉल का उल्लंघन है, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादा पर भी चोट है।