कटघरी की धरती में गूंजेगी पंडवानी आज, उर्मिला निषाद देंगी सांस्कृतिक प्रस्तुति
महिला समिति कंवरपारा–कोटापारा की पहल से अगले पीढ़ी को मिलेगी छत्तीसगढ़ी संस्कृति से जुड़ाव, 22 अक्टूबर की शाम होगी यादगार
कटघरी की धरती में गूंजेगी पंडवानी आज, उर्मिला निषाद देंगी सांस्कृतिक प्रस्तुति
महिला समिति कंवरपारा–कोटापारा की पहल से अगले पीढ़ी को मिलेगी छत्तीसगढ़ी संस्कृति से जुड़ाव, 22 अक्टूबर की शाम होगी यादगार
अकलतरा : अकलतरा क्षेत्र के ग्राम पंचायत कटघरी में इस वर्ष भी दीपावली के पावन अवसर पर परंपरा और संस्कृति का संगम देखने को मिलेगा। महिला समिति कंवरपारा-कोटापारा कटघरी द्वारा छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध बाल पंडवानी गायिका कुमारी उर्मिला निषाद का पंडवानी कार्यक्रम 22 अक्टूबर की शाम आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम शाम 7 बजे से रात 11 बजे तक ग्राम कटघरी में सांस्कृतिक मंच पर होगा। पिछले तीन-चार वर्षों से महिला समिति इस आयोजन को निरंतरता दे रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ की लोक विधाओं को संरक्षित रखना और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से परिचित कराना है। हर वर्ष अलग-अलग लोकप्रिय लोक कलाकारों को आमंत्रित कर यह समिति सांस्कृतिक परंपरा का दीप जलाए हुए है।
समिति ने गांव सहित आसपास के क्षेत्रों के निवासियों से बड़ी संख्या में शामिल होकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है, ताकि पंडवानी जैसी लोककला नई पीढ़ी में भी जीवंत रहे।
पंडवानी पर संक्षेप जानकारी
* पंडवानी छत्तीसगढ़ की प्राचीन लोक-गायन विधा है
* महाभारत के प्रसंगों को गीत और अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है।
* पंडवानी दो शैलियों में होती है।
* वेदमती शैली– बैठकर गायन
* कापालिक शैली– खड़े होकर अभिनय सहित गायन कापालिक शैली की सबसे प्रमुख कलाकार पद्मश्री तीजन बाई हैं।
* वेदमती शैली की अग्रणी कलाकार रितु वर्मा मानी जाती हैं।
* इस परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में उषा बारले सहित युवा पीढ़ी के कलाकारों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
महिला समिति द्वारा आयोजित यह संध्या न केवल मनोरंजन का अवसर होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में लोककला और सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखने का प्रेरक उदाहरण भी पेश करेगी। बाल पंडवानी गायिका उर्मिला निषाद अपनी प्रस्तुति के माध्यम से महाभारत के पांडवों की कथा लोक शैली में प्रस्तुत करेंगी।