घण्टेभर से गुल बिजली और लापरवाह अधिकारी, राष्ट्रीय मंच पर शर्मसार हुआ जिला
बुकिंग के बावजूद न साउंड ऑपरेटर, न जिम्मेदार अधिकारी, अव्यवस्था ने खोली पोल
जांजगीर-चांपा। जिला पंचायत कार्यालय के समीप स्थित सर्वसुविधायुक्त जिला ऑडिटोरियम, जिस पर जिले को गर्व होना चाहिए, आज अपनी ही बदहाली पर आंसू बहा रहा है। लाखों रुपये की सरकारी लागत से हुए निर्माण के बावजूद यह भवन आज तक अपनी पहचान से वंचित है। न तो इसकी दीवारों पर कोई नामपट्ट लगा है, न ही यहां तक पहुंचने के लिए कहीं कोई संकेतक बोर्ड मौजूद है।
विडंबना यह है कि यही ऑडिटोरियम शासन-प्रशासन के बड़े-बड़े कार्यक्रमों की मेजबानी करता है, जहां जिले के आला अधिकारी और जनप्रतिनिधि शिरकत करते हैं, लेकिन किसी की नजर इस शर्मनाक लापरवाही पर नहीं पड़ती।
गैर-सरकारी आयोजनों के लिए यहां मोटी बुकिंग राशि वसूली जाती है, लेकिन इसके बावजूद परिसर की स्थिति अत्यंत दयनीय है। हर कोने में झाड़-झंखाड़, गंदगी के ढेर और बदहाल व्यवस्थाएं यह साबित कर रही हैं कि जिम्मेदार केवल पैसा वसूलने में तत्पर हैं, देखरेख के प्रति पूरी तरह उदासीन।
करीब दो वर्ष पूर्व बनकर तैयार हुआ यह ऑडिटोरियम अब धीरे-धीरे खंडहर की ओर बढ़ रहा है। सवाल यह उठना लाज़मी है कि जब उपयोग के नाम पर इतनी बड़ी रकम वसूली जा रही है, तो वह राशि आखिर जा कहां रही है?
कार्यक्रम के दिन भी गहराया अंधेरा और अव्यवस्था
आज दिनांक 30 नवंबर 2025, सुबह आयोजित ‘नृत्य नाद स्वरम्’ जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए ऑडिटोरियम बुक किया गया था, लेकिन स्थिति यह रही कि मौके पर न कोई साउंड ऑपरेटर मौजूद था, कोई जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी दिखाई नहीं पड़ा और ऊपर से करीब एक घंटे तक बिजली गुल रही।
ऐसे में सोचा जा सकता है कि यदि यह ऑडिटोरियम किसी राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम के लिए बुक है, तो जिले की कितनी किरकिरी हो रही होगी। हालात यह साबित कर रहे हैं कि जिले का यह एकमात्र ऑडिटोरियम आज जिम्मेदारों की लापरवाही की भेंट चढ़ चुका है और जिले की साख को गहरा नुकसान पहुंचा रहा है।
अब सवाल है क्या जिम्मेदार जागेंगे या यह इमारत ऐसे ही बदनामी की इबारत लिखती रहेगी?