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खाकी की सौदेबाज़ी! हिरण शिकारियों को राहत, रिश्वत ने दबा दी पूरी कहानी

बलौदा में हिरण शिकार को दबाने खेला गया 1.50 लाख का बड़ा खेल, अफसरों को भनक तक नहीं, पर्दे के पीछे सब सेटिंग!

खाकी की सौदेबाज़ी! हिरण शिकारियों को राहत, रिश्वत ने दबा दी पूरी कहानी

बलौदा में हिरण शिकार को दबाने खेला गया 1.50 लाख का बड़ा खेल, अफसरों को भनक तक नहीं, पर्दे के पीछे सब सेटिंग!

जांजगीर-चांपा : जिले के बलौदा क्षेत्र में एक बार फिर वर्दी पर गहरा दाग लगाता मामला सामने आया है। 1 दिसंबर को एक पिकअप वाहन के घटनाक्रांत होने की सूचना पर बलौदा पुलिस मौके पर पहुँची और दुर्घटना संबंधी प्रकरण दर्ज भी किया। लेकिन उसी समय मिली एक दूसरी सूचना ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया, सूचना थी कि ग्राम बिरगहनी (ब) में कुछ युवक हिरण का अवैध शिकार कर उसका मांस बेच रहे हैं और कई लोग उसे खरीद भी चुके हैं। सूचना की पुष्टि होते ही पुलिस मौके पर पहुँची, हिरण का मांस ज़ब्त किया और कुछ युवकों को थाने भी ले आई। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत हिरण का शिकार 3 से 7 वर्ष की सख्त सजा वाला अपराध है, पर थाने पहुँचने के बाद खेल बदल गया।

सूत्र बताते हैं कि हिरण शिकार जैसे गंभीर अपराध में कानूनी कार्रवाई करने के बजाय वर्दीधारी पुलिसकर्मियों ने दो आरोपियों से 75-75 हजार रुपये, कुल 1 लाख 50 हजार रुपये की मोटी रिश्वत लेकर पूरा मामला दबा दिया। इसी बीच, जब वन विभाग के बिट गार्ड को जानकारी लगी, तो उसने भी कार्रवाई के बजाय मामले को दबाने की पूरी साजिश में हाथ मिला दिया। स्थानीय लोग कहते हैं कि अगर विभाग चाहे तो ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई हो सकती है, पर यहाँ तो उल्टा मामला रफा-दफा करने की ही तैयारी दिख रही है।

ग्रामीणों में रोष “पशु खेत उजाड़ें तो तुरंत कार्रवाई, लेकिन शिकारी बच निकलते हैं”

यह पहली बार नहीं है जब बिरगहनी क्षेत्र में वन्यजीवों का अवैध शिकार हुआ हो। हाल ही में इसी गांव में जंगली सुअर को चाकू मारकर क्रूरता से शिकार करने का मामला सामने आया था, जहाँ पुलिस ने कार्रवाई के बजाय “समझौते” में मामला शांत करा दिया था। ग्रामीणों का कहना है कि फसल नुकसान पहुँचाने वाले वन्य प्राणियों पर तो त्वरित कार्रवाई होती है, लेकिन शिकारियों को लगातार मिल रही ‘मोहलत’ इस पूरे क्षेत्र में शिकार की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रही है।

पहले भी दबा दिए गए कई मामले, कार्रवाई का ग्राफ शून्य के करीब

बलौदा थाना क्षेत्र में कटरा–बिरगहनी जंगल के पास जंगली सुअर शिकार के लिए करंट बिछाने का मामला 2020 से लंबित है। 2022 में आरोपी हीरालाल सरगम, दिलेश पाटले आदि की गिरफ्तारी तो हुई, लेकिन आगे कोई कड़ी कार्रवाई न हो सकी।सक्ती थाना क्षेत्र में भी करंट से शिकार करने में तीन आरोपी पकड़े गए, जिसमें एक ग्रामीण की मौत तक हो गई थी। पंतोरा उप-थाना क्षेत्र के खैजा गांव में करंट के तार से युवक गौतम लहरे की मौत हुई, पर मामले की गति बेहद धीमी रही। जांजगीर-चांपा जिले में हिरण और जंगली सुअर शिकार के कई मामले दर्ज तो होते हैं, लेकिन कार्रवाई की दर बेहद नगण्य है। अब हिरण शिकार पर रिश्वत लेकर आरोपियों को छोड़ने का यह नया मामला पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

पुलिस और वन विभाग, दोनों पर सवाल

वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी की ओर से भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों के बीच यह धारणा बन रही है कि पुलिस और वन विभाग की मिलीभगत से ही ऐसे गंभीर अपराधों को रफा-दफा किया जाता है। अब पूरा जिला इस बात पर निगाहें गड़ाए है कि उच्च अधिकारी इन गंभीर आरोपों पर क्या कार्रवाई करेंगे, क्योंकि मामला केवल रिश्वतखोरी का नहीं, बल्कि कानून, वन्यजीव संरक्षण और प्रशासनिक विश्वसनीयता का है।

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