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तीन दशक बाद गले मिले जांजगीर के 12वीं बैच के दोस्त, यादों का कारवां हुआ ताज़ा

1994 बैच का यादगार पुनर्मिलन… कोई आया बैंगलुरू से तो कोई कबीरधाम से

तीन दशक बाद गले मिले जांजगीर के 12वीं बैच के दोस्त, यादों का कारवां हुआ ताज़ा

1994 बैच का यादगार पुनर्मिलन… कोई आया बैंगलुरू से तो कोई कबीरधाम से

जांजगीर-चांपा के शासकीय बहुद्देश्यीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के 12वीं बैच के दोस्त 31 साल बाद जुटे एक साथ, हंसी-मजाक, यादें और भावनाओं से भरा रहा मिलन समारोह

 

जांजगीर। दोस्ती सिर्फ नाम नहीं, वह ऐसा रिश्ता है जो वक्त के हर मोड़ पर मजबूती देता है—यह दृश्य 21 दिसम्बर 2025 को जांजगीर में तब देखने मिला, जब शासकीय बहुद्देश्यीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जांजगीर के 1994 के 12वीं बैच के साथी 31 साल बाद दोबारा मिले। तीन दशक बाद हुए इस मिलन समारोह में जब सभी मित्र एक-दूसरे से गले मिले तो मानो स्कूल के दिन फिर से जीवंत हो उठे।

 

इस मिलन का सबसे भावुक पक्ष यह रहा कि सभी दोस्तों ने अपने जीवन की कहानियां साझा कीं। कोई आज बेहद सफल है, कोई संघर्षों से गुजर रहा है… किसी की कहानी ने सबको भावुक कर दिया तो किसी की बातों ने सबको हिम्मत दी। कुछ मित्रों ने अपनी जीवन यात्रा सुनाते-सुनाते माहौल को हल्का कर दिया और दोस्ताना ठिठोली से सबको गुदगुदा दिया।

कार्यक्रम में दोस्तों ने एक ऐसा संकल्प दिलाया जिसने इस मिलन को सिर्फ यादगार ही नहीं बल्कि अर्थपूर्ण भी बना दिया। उन्होंने कहा कि “हम सभी दोस्त सिर्फ यादें ताजा करने के लिए नहीं मिले, बल्कि यह वचन देने के लिए भी कि अगर हमारे किसी साथी को कभी जीवन में किसी भी कारण से तकलीफ आए, तो हम सब उसके साथ खड़े रहेंगे। दोस्ती केवल फोटो और यादों तक सीमित नहीं रहेगी, यह साथ निभाने का वादा है।”

मिलन समारोह के संचालन और गर्मजोशी भरा व संगीतमय माहौल बनाने में ओमप्रकाश स्वर्णकार, मनोज अग्रवाल और विवेक चौरसिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं इस यादगार पल के साक्षी बने- राधा कृष्ण गोपाल, भोलेनाथ तिवारी, शैलेष भोपालपुरिया, मनोज राठौर, प्रमोद राठौर, भागवत राठौर, हरिहर आदित्य, दिनेश राठौर, नरेश पैगवार, नरेश कारके, अमित साहू, रामकुमार साहू, संदीप अग्रवाल, विकास खेमका, गोविंद शर्मा, सुनील राठौर, रामनारायण राठौर, ऋषि अग्रवाल, संदीप तिवारी, फेंकू लाल गढ़ेवाल, सुरेश तंबोली, जुगलकिशोर अग्रवाल, देवेंद्र बंसल, सुनील उपाध्याय, प्रदीप राठौर और नटवर टंकोरिया।

विदेश में कार्यरत एक साथी लक्ष्मी सिंह क्षत्रिय को भी वीडियो कॉल के माध्यम से जोड़कर इस दोस्ताना परिवार को एक सूत्र में बांध दिया गया। अंत में सभी ने यह भी तय किया कि यह मिलन अब सिर्फ याद नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में भी समय-समय पर सभी एकत्र होकर दोस्ती के इस रिश्ते को जीवित और मजबूत बनाए रखेंगे।

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