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दिव्यांग छात्रों से अमर्यादित व्यवहार का मामला गहराया, पुराने आरोप भी आए सामने

आश्रय दत्त कर्मशाला तिफरा में रसोइया पर गंभीर आरोप, 2018 में भी अभद्रता के चलते हो चुका है निष्कासन

दिव्यांग छात्रों से अमर्यादित व्यवहार का मामला गहराया, पुराने आरोप भी आए सामने

आश्रय दत्त कर्मशाला तिफरा में रसोइया पर गंभीर आरोप, 2018 में भी अभद्रता के चलते हो चुका है निष्कासन

बिलासपुर। शासकीय आश्रय दत्त कर्मशाला तिफरा, बिलासपुर में निवासरत दिव्यांग छात्रों के साथ अमर्यादित व्यवहार के आरोपों का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। वर्तमान शिकायत के साथ ही रसोइया तिजराम बांदले के विरुद्ध पूर्व में भी इसी प्रकार के आरोप सामने आने से प्रकरण और संवेदनशील हो गया है।

दिव्यांग छात्रों द्वारा कलेक्टर संजय अग्रवाल को सौंपे गए शिकायती पत्र में उल्लेख किया गया है कि दिसंबर 2025 में जिला प्रशासन द्वारा उन्हें शासकीय आश्रय दत्त कर्मशाला तिफरा में ठहरने की व्यवस्था दी गई थी। यहां रहकर छात्र नियमित रूप से अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। आरोप है कि कर्मशाला में कार्यरत रसोइया तिजराम बांदले द्वारा छात्रों के साथ बार-बार अभद्र, अपमानजनक एवं अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया तथा उन्हें शासकीय सुविधाओं का हकदार न बताते हुए मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

दिव्यांगों को हो रही परेशानियों की जानकारी मिलने पर निःशक्त जन अधिकार सहयोग समिति के प्रदेश अध्यक्ष राधा कृष्ण गोपाल आश्रय दत्त कर्मशाला पहुंचे। उन्होंने मौके पर पीड़ित विद्यार्थियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और बाद में दिव्यांग छात्रों को साथ लेकर कलेक्टर बिलासपुर श्री अग्रवाल से मुलाकात कर पूरे प्रकरण से अवगत कराया।

प्रकरण को सुनने के बाद कलेक्टर ने मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल कार्रवाई करने की बात कही और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। कलेक्टर के इस आश्वासन से दिव्यांग छात्रों में राहत की उम्मीद जगी है।

इस बीच सामने आया है कि रसोइया तिजराम बांदले के विरुद्ध यह पहला मामला नहीं है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2018 में शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बधितार्थ विद्यालय सह छात्रावास, तिफरा में पदस्थ रहते हुए तत्कालीन अधीक्षक आर. के. पाठक जो कि दृष्टि बाधित थे, के साथ भी उनके द्वारा गाली-गलौच की गई थी। उस समय यह मामला गंभीर पाए जाने पर तत्कालीन अधीक्षक की शिकायत पर तत्कालीन संयुक्त संचालक के द्वारा उन्हें संस्था से हटा दिया गया था।

पुराने प्रकरण के उजागर होने के बाद अब वर्तमान मामले में कार्रवाई की मांग और तेज हो गई है। दिव्यांग छात्रों एवं सामाजिक संगठन का कहना है कि बार-बार ऐसे आरोप सामने आना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है और ऐसे व्यक्ति को शासकीय संस्थान में कार्यरत रखना उचित नहीं है।

अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं, जिससे यह तय होगा कि दिव्यांग छात्रों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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