नंदौरखुर्द धान उपार्जन केंद्र में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा
बिना टोकन जांच हो रही तौल, तय सीमा से अधिक धान लेने और तौल मशीन का सील टूटा मिला
सक्ति। जिले के नंदौरखुर्द स्थित धान उपार्जन केंद्र में धान खरीदी के दौरान गंभीर लापरवाही और अनियमितताओं का सनसनीखेज मामला सामने आया है। उपार्जन केंद्र का पंजीयन क्रमांक 1061 है, जहां शासन द्वारा निर्धारित गाइडलाइन का पालन नहीं किए जाने के आरोप लगे हैं। मीडिया की टीम के मौके पर पहुंचने के बाद कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए।
जानकारी के अनुसार, उपार्जन केंद्र प्रभारी द्वारा किसानों से तय तह माप से अधिक 41.300 किलोग्राम धान लिया जा रहा है। यह स्थिति तब सामने आई जब खरीदी प्रक्रिया का अवलोकन किया गया। किसानों ने बताया कि उनसे निर्धारित मानक से अधिक धान तौल में शामिल किया जा रहा है, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मामले में सबसे गंभीर पहलू तौल प्रक्रिया से जुड़ा पाया गया। जिस तौल मशीन पर धान तौलने के निर्देश दिए जा रहे थे, उसका सील टूटा हुआ मिला। सील टूटे होने की स्थिति में मशीन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि मशीन में किसी प्रकार की सेटिंग की गई हो सकती है।
इसके अलावा, शासन द्वारा जारी स्पष्ट दिशा-निर्देशों का भी पालन नहीं किया जा रहा है। नियमों के अनुसार, उपार्जन केंद्र के प्रवेश द्वार पर किसान के टोकन की जांच की जानी चाहिए तथा तौल से पूर्व किसान का फोटो भी लिया जाना अनिवार्य है। किंतु नंदौरखुर्द धान उपार्जन केंद्र में न तो टोकन की समुचित जांच की जा रही है और न ही फोटो लेने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
मौके पर यह भी देखा गया कि किसानों के अलावा अन्य लोग भी धान लेकर बिक्री के लिए पहुंच रहे हैं, जिसे रोकने की जिम्मेदारी केंद्र प्रभारी की होती है। बावजूद इसके, ऐसे मामलों में किसी प्रकार की आपत्ति नहीं की जा रही है। इससे खरीदी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है।
पूरे मामले के सामने आने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शासन एवं जिला प्रशासन इस तरह की गंभीर लापरवाही और अनियमितताओं को लेकर क्या कार्रवाई करता है। किसानों को उम्मीद है कि मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध उचित कदम उठाए जाएंगे, ताकि धान खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वास बहाल हो सके।