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अंगारखार भ्रष्टाचार की जांच अधर में, ढाई माह बाद भी रिपोर्ट नदारद

सीईओ के निर्देशों के बावजूद तीन सदस्यीय जांच दल तय समयसीमा में विफल, नोटिस–नोटिस का खेल बना जांच प्रक्रिया

अंगारखार भ्रष्टाचार की जांच अधर में, ढाई माह बाद भी रिपोर्ट नदारद

सीईओ के निर्देशों के बावजूद तीन सदस्यीय जांच दल तय समयसीमा में विफल, नोटिस–नोटिस का खेल बना जांच प्रक्रिया

जांजगीर-चाम्पा : बलौदा विकासखंड के ग्राम पंचायत अंगारखार में सामने आए कथित भ्रष्टाचार के मामलों की जांच ढाई माह बीत जाने के बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। जांच में हो रही देरी को लेकर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के बीच सवाल उठने लगे हैं। पंचायत में शासकीय राशि के कथित दुरुपयोग से जुड़े कई मामलों पर 24 नवंबर 2025 को जनपद पंचायत सीईओ द्वारा तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया गया था। जांच दल को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वह सात दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करे, लेकिन अब तक जांच प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है।

जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत के सचिव पर आरोप है कि पंचायत की शासकीय राशि ग्राम के निवासी महेंद्र कुर्मी के खाते में डाली गई और बाद में फोन-पे के माध्यम से वापस ले ली गई। वहीं, महेंद्र कुर्मी द्वारा स्वयं को जागरूक किसान बताते हुए पंचायत की राशि ‘पचरी मरम्मत’ के नाम पर ली गई, लेकिन आज तक पचरी का निर्माण नहीं हो पाया है।

इसी तरह, ग्राम के ही मुकेश लहरे द्वारा भी 35 हजार रुपये पचरी मरम्मत के नाम पर निकाले जाने और उस राशि के पंचायत के कुछ पंचों में बांटे जाने का आरोप सामने आया है। गांव के स्कूल में हैंडपंप मरम्मत के नाम पर बिल निकाले जाने का मामला भी जांच के दायरे में है, जबकि स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि उन्हें अब तक किसी मरम्मत कार्य की जानकारी नहीं है।

इसके अलावा, ग्राम के स्कूल में प्रस्तावित शौचालय निर्माण की राशि को कथित तौर पर आंगनबाड़ी भवन निर्माण में उपयोग किए जाने की बात भी सामने आई है। ऐसे कई प्रकरण हैं, जिन पर जांच के लिए जांच दल गठित किया गया था।

मीडिया द्वारा जब जनपद पंचायत सीईओ से जांच की प्रगति को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने बताया कि जांच दल द्वारा सचिव को बार-बार नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन अब तक उनका जवाब नहीं मिला है। सीईओ के अनुसार, अंतिम बार नोटिस दिया जा रहा है, इसके बाद भी जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

बहरहाल, ढाई माह बाद भी जांच रिपोर्ट लंबित रहने से जांच दल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ग्राम अंगारखार में सामने आए इन मामलों की जांच कब पूरी होती है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है, या फिर यह मामला समय के साथ ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

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