छत्तीसगढ़ में भर्ती घोटाले का बड़ा पर्दाफाश शिक्षा विभाग में फर्जी नियुक्तियों पर गिरी गाज
राज्य शिक्षा आयोग के फर्जी आदेश से वर्षों तक नौकरी, दो जिलों में आठ कर्मचारी बर्खास्त, गंभीर धाराओं में एफआईआर
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी भर्तियों में फर्जीवाड़े का एक और बड़ा मामला सामने आया है। शिक्षा विभाग में राज्य शिक्षा आयोग के नाम पर जारी फर्जी आदेशों के आधार पर वर्षों से नौकरी कर रहे कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। जांच पूरी होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारियों ने केसीजी और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी (एमएमएसी) जिलों में कार्यरत कुल आठ कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है, जबकि संबंधित थानों में सभी आरोपियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर पुलिस ने विवेचना शुरू कर दी है।
फर्जी आदेश के सहारे मिली नौकरी
जानकारी के अनुसार वर्ष 2021–22 के दौरान राज्य शिक्षा आयोग के कथित आदेशों के आधार पर अलग-अलग स्कूलों में सहायक ग्रेड-3 और डेटा एंट्री ऑपरेटर के पदों पर नियुक्तियां की गई थीं। केसीजी जिले में अजहर सिद्दीकी, फजेंद्र कुमार सिन्हा, टीकमचंद साहू और रजिया अहमद नियुक्त पाए गए, जबकि एमएमएसी जिले में डोलामण मटारी, शादाब उस्मान, आशुतोष कछवाहा और अमीन शेख विभिन्न शासकीय विद्यालयों में पदस्थ थे।
दस्तावेजों की जांच में सामने आई जालसाजी
नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जिस आदेश क्रमांक के आधार पर नियुक्तियां दर्शाई गई थीं, वह क्रमांक वास्तव में राज्य शिक्षा आयोग द्वारा बैंक ऑफ बड़ौदा, विवेकानंद नगर शाखा को जारी एक पत्र का निकला। इसके अलावा आदेश पत्रों पर अंकित आयोग के तत्कालीन सचिव डॉ. ओपी मिश्रा के हस्ताक्षर भी आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे थे। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि नियुक्ति आदेश पूरी तरह फर्जी थे।
डीईओ की सख्त कार्रवाई, तत्काल बर्खास्तगी
फर्जीवाड़े की पुष्टि के बाद जिला शिक्षा अधिकारी लालजी द्विवेदी ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम, 1966 के नियम 10(9) के तहत आरोपित कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से पृथक कर दिया। विभागीय स्तर पर कार्रवाई के साथ ही पुलिस को भी पूरे प्रकरण की जानकारी दी गई।
आठ आरोपियों पर एफआईआर, पुलिस जांच तेज
जिला शिक्षा अधिकारियों की शिकायत पर केसीजी जिले के खैरागढ़ थाना और एमएमएसी जिले के मोहला थाना में अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 420, 467, 468 और 471 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
भर्तियों में पारदर्शिता पर उठे सवाल
दो जिलों में सामने आए इस फर्जी नियुक्ति प्रकरण ने छत्तीसगढ़ में सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विभाग का कहना है कि ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत पाए जाने पर दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। विभागीय और पुलिस जांच के जरिए पूरे नेटवर्क की परतें खोलने की कार्रवाई जारी है।