छत्तीसगढ़टेक्नोलॉजीदेशराज्यलोकल न्यूज़

पुष्पोत्पादन से बढ़ेगी किसानों की आय, तकनीकी मार्गदर्शन से खुले नए अवसर

सांकरा उद्यानिकी महाविद्यालय के विशेषज्ञों ने दी आधुनिक फूल खेती की जानकारी

पुष्पोत्पादन से बढ़ेगी किसानों की आय, तकनीकी मार्गदर्शन से खुले नए अवसर

सांकरा उद्यानिकी महाविद्यालय के विशेषज्ञों ने दी आधुनिक फूल खेती की जानकारी

मुंगेली। महत्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, दुर्ग के अंतर्गत उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, सांकरा द्वारा आयोजित कृषक प्रशिक्षण सह प्रदेश भ्रमण एवं गेंदा पौधा प्रक्षेत्र प्रदर्शन कार्यक्रम में किसानों को पुष्प की उन्नत खेती के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

कार्यक्रम में अधिष्ठाता डॉ. अमित दीक्षित एवं वैज्ञानिक डॉ. भारती साव ने उपस्थित किसानों को फूलों की व्यावसायिक खेती की आधुनिक तकनीकों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ की जलवायु पुष्प उत्पादन के लिए अनुकूल है और यदि किसान वैज्ञानिक पद्धति अपनाएं तो कम लागत में अधिक लाभ अर्जित कर सकते हैं।

डॉ. दीक्षित ने अपने संबोधन में कहा कि गेंदा, गुलाब, रजनीगंधा एवं ग्लैडियोलस जैसे फूलों की मांग वर्षभर बनी रहती है। धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों में इनकी खपत अधिक होने से किसानों को बाजार की अच्छी संभावनाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने बीज चयन, नर्सरी प्रबंधन, उर्वरक संतुलन एवं कीट-रोग नियंत्रण के विषय में व्यवहारिक जानकारी दी।

वैज्ञानिक डॉ. भारती साव ने गेंदा की उन्नत किस्मों, रोपाई की दूरी, सिंचाई प्रबंधन तथा उत्पादन बढ़ाने के उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि समय पर निराई-गुड़ाई और उचित पोषण प्रबंधन से प्रति एकड़ उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। साथ ही, किसानों को फसल बीमा एवं शासकीय योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान किसानों ने प्रक्षेत्र का अवलोकन किया तथा वैज्ञानिकों से सीधे संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। इस अवसर पर उद्यानिकी विश्वविद्यालय से डॉ गागेन्द्र सिंह राजपूत, डॉ. आयुशी, स्वाति विश्वकर्मा, शशिकांत साहू ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी मुंगेली सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन एवं कृषक उपस्थित रहे।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहेगा, जिससे किसानों को नई तकनीकों की जानकारी मिलती रहे और वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।

Related Articles

One Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!