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दिव्यांग नियुक्तियों में सख्ती: अब राज्य मेडिकल बोर्ड की जांच और स्थायी दिव्यांगता प्रमाण पत्र अनिवार्य

राजपत्र में अधिसूचना जारी, फर्जीवाड़े पर रोक के लिए कड़े प्रावधान, केवल स्थायी दिव्यांगजनों को ही मिलेगा आरक्षण लाभ

दिव्यांग नियुक्तियों में सख्ती: अब राज्य मेडिकल बोर्ड की जांच और स्थायी दिव्यांगता प्रमाण पत्र अनिवार्य

राजपत्र में अधिसूचना जारी, फर्जीवाड़े पर रोक के लिए कड़े प्रावधान, केवल स्थायी दिव्यांगजनों को ही मिलेगा आरक्षण लाभ

 

नया रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग ने दिव्यांगजनों को मिलने वाले आरक्षण और शासकीय नियुक्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त प्रावधान लागू किए हैं। इस संबंध में छत्तीसगढ़ राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित कर दी गई है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि अब नियुक्ति प्रक्रिया में राज्य मेडिकल बोर्ड की जांच और स्थायी दिव्यांगता प्रमाण पत्र को अनिवार्य किया गया है।

अधिसूचना के अनुसार, किसी भी पद पर चयनित दिव्यांग अभ्यर्थी की नियुक्ति से पूर्व राज्य मेडिकल बोर्ड द्वारा उसकी शारीरिक स्थिति का परीक्षण किया जाएगा। साथ ही, प्रस्तुत दिव्यांगता प्रमाण पत्र की वैधता की पुष्टि भी अनिवार्य होगी। यह प्रावधान सभी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों एवं निकायों में समान रूप से लागू रहेगा।

इसके अलावा शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि आरक्षण का लाभ केवल उन अभ्यर्थियों को दिया जाएगा जिनके पास सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी स्थायी दिव्यांगता प्रमाण पत्र होगा। अस्थायी या संदिग्ध प्रमाण पत्र के आधार पर किसी भी प्रकार की नियुक्ति या लाभ मान्य नहीं होगा।

विभागीय स्तर पर गठित विशेष समिति द्वारा विभिन्न पदों की पहचान कर सूची तैयार की गई है, जिसे अधिसूचना के माध्यम से लागू किया गया है। संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया है कि नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान इन प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।

जारी अधिसूचना (संक्षेप में मुख्य बिंदु):

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत राज्य के सभी विभागों में पदों की पहचान कर उन्हें विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।

प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर दिव्यांगजनों के लिए उपयुक्त पदों की सूची जारी की गई है।

फीडर कैडर के जिन पदों के लिए दिव्यांगजन उपयुक्त पाए गए हैं, उनके पदोन्नति पदों पर भी यह प्रावधान लागू रहेगा।

नियुक्ति के समय राज्य मेडिकल बोर्ड द्वारा दिव्यांगता की अनिवार्य जांच और प्रमाण पत्र की पुष्टि आवश्यक होगी।

आरक्षण का लाभ केवल स्थायी दिव्यांगता प्रमाण पत्र धारकों को ही प्रदान किया जाएगा।

सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध प्रमाण पत्र के बिना किसी भी अभ्यर्थी को लाभ नहीं दिया जाएगा।

यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।

संघ ने जताई खुशी, बताया संघर्ष की जीत

इस अधिसूचना के जारी होने पर छत्तीसगढ़ दिव्यांग सेवा संघ से जुड़े दिव्यांगजनों ने खुशी व्यक्त की है। संघ के सदस्यों ने इसे वर्षों के संघर्ष और प्रयासों का परिणाम बताया।

छत्तीसगढ़ दिव्यांग सेवा संघ के प्रदेश संरक्षक राधा कृष्ण गोपाल ने कहा कि लंबे समय से दिव्यांगजनों के हितों की सुरक्षा और सही पात्रों को लाभ दिलाने के लिए प्रयास किए जा रहे थे। अब राज्य मेडिकल बोर्ड की अनिवार्य जांच और स्थायी प्रमाण पत्र की शर्त लागू होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और वास्तविक हितग्राहियों को लाभ मिलेगा।

वहीं छत्तीसगढ़ दिव्यांग सेवा संघ के प्रदेश अध्यक्ष संतोष टोंडे ने बताया कि यह निर्णय दिव्यांगजनों के अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर लाभ लेने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी और योग्य दिव्यांगजनों को न्याय मिल सकेगा।

राज्य शासन द्वारा जारी इस अधिसूचना के बाद दिव्यांगजनों की नियुक्तियों में पारदर्शिता बढ़ने और पात्र हितग्राहियों को ही लाभ मिलने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

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