जीते-जी ‘मृत’ घोषित दिव्यांग, पहचान साबित करने दर-दर भटकने को मजबूर
आधार रिकॉर्ड में गलती से रुका राशन, फरवरी से नहीं मिला अनाज, कलेक्टर कार्यालय के चक्कर काट रहा पीड़ित
जीते-जी ‘मृत’ घोषित दिव्यांग, पहचान साबित करने दर-दर भटकने को मजबूर
आधार रिकॉर्ड में गलती से रुका राशन, फरवरी से नहीं मिला अनाज, कलेक्टर कार्यालय के चक्कर काट रहा पीड़ित
जांजगीर-चाम्पा। प्रशासनिक लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक दिव्यांग व्यक्ति को जीते-जी आधार रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया। इसके चलते वह न केवल अपनी पहचान साबित करने के लिए भटक रहा है, बल्कि उसे शासन की मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित होना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, अधूरा चौक, बेलदार पारा वार्ड क्रमांक 12 चाम्पा निवासी दिव्यांग बैसाखू कुम्हार उस समय हतप्रभ रह गया, जब वह राशन लेने अपने वार्ड की उचित मूल्य दुकान पहुंचा। यहां अंगूठा लगाकर सत्यापन करने पर मशीन ने उसे पहचानने से इंकार कर दिया। संदेह होने पर जब वह केवाईसी कराने नगरपालिका कार्यालय पहुंचा, तब उसे पता चला कि उसके आधार नंबर में उसे मृत दर्शाया गया है।
इस अप्रत्याशित स्थिति ने बैसाखू कुम्हार को गहरे संकट में डाल दिया है। शारीरिक रूप से अक्षम होने के कारण वह स्वयं चलने-फिरने में भी असमर्थ है, बावजूद इसके उसे अपनी जीवित होने की पुष्टि कराने के लिए कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि फरवरी माह से वह राशन नहीं उठा पा रहा है, जिससे उसके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। आधार से जुड़े अन्य शासकीय लाभ भी बंद होने की आशंका बनी हुई है।
पीड़ित बैसाखू कुम्हार ने बताया कि वह लगातार अपने आपको जिंदा साबित करने के लिए अधिकारियों के पास जा रहा है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। मामले में कलेक्टर कार्यालय के भी चक्कर लगाए जा रहे हैं, जिससे उसे राहत मिलने की उम्मीद है।
वहीं स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर किस प्रकार एक जीवित व्यक्ति को रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया और अब तक सुधार की प्रक्रिया क्यों नहीं हो पाई है।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है और संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है, ताकि पीड़ित को जल्द राहत मिल सके।