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‘मांग लेकर आए थे, मानो मुजरिम ठहराए गए’- घड़ी चौक से तूता तक दिव्यांगों की दिनभर की दौड़

प्रदर्शनकारियों का आरोप- जबरन बसों में बैठाकर तूता भेजा, सुविधाओं के अभाव पर उठे सवाल

‘मांग लेकर आए थे, मानो मुजरिम ठहराए गए’- घड़ी चौक से तूता तक दिव्यांगों की दिनभर की दौड़

छह सूत्रीय मांगों को लेकर राजधानी पहुंचे दिव्यांग, पुलिस ने आदेश का हवाला देकर रोका मार्च

प्रदर्शनकारियों का आरोप- जबरन बसों में बैठाकर तूता भेजा, सुविधाओं के अभाव पर उठे सवाल

रायपुर। राजधानी में शुक्रवार को उस समय असामान्य हालात बन गए जब छत्तीसगढ़ दिव्यांग सेवा संघ के आह्वान पर प्रदेशभर से दिव्यांगजन अपनी छह सूत्रीय मांगों को लेकर घड़ी चौक पहुंचने लगे। दोपहर 12:30 बजे मुख्यमंत्री निवास तक शांतिपूर्ण मार्च कर शासन को अपनी मांगों से अवगत कराने की योजना थी।

दिव्यांगजन एक-एक कर घड़ी चौक पहुंचना शुरू ही हुए थे कि पुलिस प्रशासन ने कमिश्नरेट के आदेश का हवाला देते हुए उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। प्रशासन के अनुसार भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत शहर के कुछ प्रमुख मार्गों पर रैली, जुलूस, धरना और प्रदर्शन पर प्रतिबंध लागू है।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आदेश में घड़ी चौक पर शांतिपूर्ण उपस्थिति की स्पष्ट मनाही का उल्लेख नहीं है। उनका आरोप था कि उन्हें राजधानी की जमीन पर कदम रखने तक नहीं दिया गया और उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। संघ के कुछ पदाधिकारियों ने इसे “तानाशाही रवैया” करार देते हुए कहा कि वे मुख्यधारा में रहकर संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने आए थे।

घटनाक्रम ने तब नया मोड़ लिया जब मौके पर मौजूद दिव्यांगजनों को एक-एक कर वाहनों और बसों में बैठाकर तूता स्थित निर्धारित धरना स्थल ले जाया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें जबरन बसों में बैठाया गया और सीधे तूता पहुंचाकर छोड़ दिया गया।

तूता धरना स्थल पर पहुंचने के बाद कई दिव्यांगजनों ने वहां मूलभूत सुविधाओं के अभाव की बात कही। उनका कहना था कि स्थल पर न तो पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था थी और न ही भोजन की। कुछ दिव्यांगजनों ने यह भी प्रश्न उठाया कि यदि इस दौरान किसी के साथ कोई अनहोनी होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।

संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि एक ओर शासन द्वारा विभिन्न अभियानों के तहत भटके हुए लोगों की घर वापसी कर सराहना बटोरी जा रही है, वहीं अपने अधिकारों की बात रखने पहुंचे दिव्यांगजनों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है।

वहीं प्रशासन का पक्ष है कि कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है तथा जारी आदेश का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है।

दिनभर चले इस घटनाक्रम ने राजधानी में व्यापक चर्चा को जन्म दिया। एक ओर अपने अधिकारों की बात कहने पहुंचे दिव्यांगजन थे, तो दूसरी ओर प्रतिबंधात्मक आदेश का हवाला देता प्रशासन, दोनों के बीच का यह दृश्य शुक्रवार को रायपुर की सड़कों पर केंद्र में रहा।

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