जांजगीर-केरा सड़क को मिली मंजूरी, श्रेय की सड़क पर दौड़ने लगे दावेदार
16.60 किमी मार्ग के लिए 10.04 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति के बाद सोशल मीडिया पर सियासी श्रेय की होड़; विधायक कार्यालय ने बताया अपना प्रयास, भाजपा नेताओं ने नारायण चंदेल की मांग को बताया आधार

जांजगीर-केरा सड़क को मिली मंजूरी, श्रेय की सड़क पर दौड़ने लगे दावेदार
16.60 किमी मार्ग के लिए 10.04 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति के बाद सोशल मीडिया पर सियासी श्रेय की होड़; विधायक कार्यालय ने बताया अपना प्रयास, भाजपा नेताओं ने नारायण चंदेल की मांग को बताया आधार
जांजगीर। जांजगीर-केरा मार्ग के मजबूतीकरण को मिली प्रशासकीय स्वीकृति के बाद सड़क निर्माण से पहले ही राजनीतिक श्रेय की दौड़ शुरू हो गई है। सड़क वही है, राशि सरकारी है और मंजूरी शासन की है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसके पीछे की ‘मेहनत’ को लेकर अलग-अलग दावे सामने आने लगे हैं। एक ओर जांजगीर-चांपा विधायक ब्यास कश्यप के कार्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति में सड़क को वर्ष 2025-26 के बजट में शामिल कराने में विधायक की पहल का उल्लेख किया गया है, तो दूसरी ओर भाजपा जिला उपाध्यक्ष समेत भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा सोशल मीडिया पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल के प्रयासों को सड़क की स्वीकृति का आधार बताया जा रहा है।

विधायक कार्यालय से जारी जानकारी के मुताबिक जांजगीर-केरा मार्ग के 16.60 किलोमीटर हिस्से के मजबूतीकरण के लिए 10 करोड़ 4 लाख 51 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति मिली है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस सड़क को वर्ष 2025-26 के बजट में शामिल कराने के लिए विधायक ब्यास कश्यप ने पहल की थी। प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के बाद विधायक ने लोक निर्माण मंत्री अरुण साव के प्रति आभार व्यक्त किया है। साथ ही रोगदा-बिरगहनी मार्ग की स्वीकृति के लिए भी प्रयास जारी रहने की बात कही गई है।
उधर सोशल मीडिया पर अलग कहानी
इधर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से सोशल मीडिया पर जारी संदेश में इसी सड़क को पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल की मांग का परिणाम बताया जा रहा है। पोस्ट में दावा किया गया है कि नारायण चंदेल की मांग पर जांजगीर से सेमरा तक सड़क मजबूतीकरण के लिए लगभग 10.60 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। पोस्ट में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए नारायण चंदेल को क्षेत्र की जनता की मांग के अनुरूप कार्य स्वीकृत कराने वाला जनसेवक बताया गया है।

यानी सरकारी स्वीकृति सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में सवाल यह नहीं रह गया कि सड़क कब बनेगी और जनता को इसका लाभ कब मिलेगा, बल्कि चर्चा इस बात की होने लगी है कि सड़क आखिर किसके प्रयास से मंजूर हुई?

सड़क एक, श्रेय के रास्ते अलग-अलग
मामला इसलिए भी दिलचस्प हो गया है क्योंकि दोनों पक्षों की ओर से सामने आए दावों में सड़क और स्वीकृति की राशि को लेकर भी अंतर दिखाई देता है। विधायक कार्यालय की विज्ञप्ति में जांजगीर-केरा मार्ग के 16.60 किलोमीटर हिस्से के लिए 10 करोड़ 4 लाख 51 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति का उल्लेख है, जबकि भाजपा की सोशल मीडिया पोस्ट में जांजगीर से सेमरा तक सड़क के लिए लगभग 10.60 करोड़ रुपये की स्वीकृति बताए जाने का दावा किया गया है।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि दोनों दावे एक ही स्वीकृति से जुड़े हैं या सड़क के अलग-अलग हिस्सों को लेकर हैं? यदि एक ही कार्य है, तो स्वीकृति की राशि और मार्ग की लंबाई के अलग-अलग आंकड़े क्यों सामने आ रहे हैं? इसका स्पष्ट जवाब संबंधित विभाग के आधिकारिक स्वीकृति आदेश से ही सामने आ सकता है।
‘सड़क’ से पहले ‘श्रेय’ की मंजिल
जांजगीर-केरा मार्ग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण सड़क है। लंबे समय से सड़क के बेहतर रखरखाव और मजबूतीकरण की जरूरत महसूस की जाती रही है। अब प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के बाद उम्मीद है कि कार्य आगे बढ़ेगा और लोगों को बेहतर सड़क मिलेगी।
लेकिन राजनीतिक श्रेय की इस दौड़ ने एक अलग ही तस्वीर सामने ला दी है। सड़क अभी जमीन पर मजबूत होनी बाकी है, मगर सोशल मीडिया पर उसके श्रेय की नींव पहले ही मजबूत करने की कोशिशें दिखाई देने लगी हैं। कोई इसे अपने प्रयास का परिणाम बता रहा है तो कोई अपने नेता की मांग का असर।
लोक निर्माण कार्यों की स्वीकृति सामान्यतः विभागीय प्रक्रिया, बजट प्रावधान, तकनीकी परीक्षण और शासन स्तर की मंजूरी के बाद होती है। ऐसे में किसी एक व्यक्ति या दल द्वारा पूरी स्वीकृति का श्रेय अपने नाम करना और दूसरे पक्ष द्वारा उसके दावे को चुनौती देना, दोनों ही दावों को आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर परखा जाना जरूरी बनाता है।
जनता का सवाल—श्रेय किसे, सड़क कब?
आखिरकार क्षेत्र की जनता के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि 16.60 किलोमीटर सड़क के मजबूतीकरण का काम कब शुरू होगा और कब पूरा होगा? सड़क की गुणवत्ता कैसी होगी और स्वीकृत राशि का उपयोग किस तरह किया जाएगा?
राजनीतिक श्रेय की होड़ अपनी जगह है, लेकिन सड़क पर चलने वाले लोगों की नजर अब सोशल मीडिया पोस्ट से ज्यादा निर्माण कार्य पर रहेगी। फिलहाल एक ही सड़क के लिए दो अलग-अलग राजनीतिक दावे सामने आने से जांजगीर की सियासत में यह चर्चा जरूर तेज हो गई है कि सड़क मजबूत होने से पहले उसके श्रेय की राजनीति कितनी मजबूत हो गई है।




