नागपंचमी पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब: दल्हा पहाड़ में एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
सूर्यकुंड के औषधीय जल से स्नान, विश्वेश्वरी देवी में नारियल चढ़ा कर श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना
नागपंचमी पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब: दल्हा पहाड़ में एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
सूर्यकुंड के औषधीय जल से स्नान, विश्वेश्वरी देवी में नारियल चढ़ा कर श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना
पुलिस की चौक-चौबंद व्यवस्था, भीड़ के बावजूद नहीं हुई कोई अप्रिय घटना
जांजगीर-चांपा/अकलतरा : नागपंचमी पर्व पर जिले के अकलतरा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पड़रिया के समीप स्थित दल्हा पहाड़ श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र बन गया। सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक पर्वत पर दर्शनार्थियों की भीड़ उमड़ती रही। करीब एक लाख श्रद्धालुओं ने दल्हा पहाड़ पहुंचकर पूजा-अर्चना की और पौराणिक परंपरा को जीवंत किया।
श्रद्धालुओं ने सिद्ध मुनि आश्रम स्थित औषधीय सूर्यकुंड के जल से स्नान कर, पहाड़ी पर स्थित विश्वेश्वरी देवी मंदिर में नारियल चढ़ाया और पूजा-अर्चना कर पुण्य लाभ लिया। मान्यता है कि नागपंचमी के दिन यहां नाग देवता के दर्शन होते हैं, जिससे इस स्थान का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
नाग देवता की पूजा, समाधि स्थल पर श्रद्धा का समर्पण
सिद्ध मुनि आश्रम में शिवलिंग के पास विराजित नाग देवता की मूर्ति की विशेष पूजा की गई। स्वामी जगदेवानन्द, जिन्होंने 1952 में यहां यज्ञ आरंभ किया था और 1983 में तपस्या करते हुए समाधि ली, उनकी समाधि स्थल पर श्रद्धालुओं ने सर्वप्रथम पुष्प अर्पित कर पूजन किया।
सूर्यकुंड का जल बना आस्था और स्वास्थ्य का संगम
दल्हा पहाड़ के प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से होकर निकलने वाला पानी सूर्यकुंड में एकत्र होता है, जो वर्षभर प्रवाहित रहता है। नागपंचमी के अवसर पर इस जल में स्नान कर श्रद्धालुओं ने शरीर और आत्मा दोनों की शुद्धि मानी।
मेला बना आकर्षण का केंद्र
पर्वत के नीचे विशाल मेला लगा, जहां तरह-तरह की दुकानों में श्रद्धालुओं ने खरीदारी की और छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का आनंद लिया। पूरे वातावरण में भक्ति, उत्सव और छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई दी।
खोलार में भी गूंजे भजन-कीर्तन, दूध-लाई से की पूजा
नवागढ़ ब्लॉक के ग्राम बर्रा स्थित खोलार में भी नागपंचमी मेला आयोजित हुआ, जहां श्रद्धालुओं ने सिद्ध बाबा की पूजा की और चट्टानों के बीच दूध-लाई रखकर नागदेवता को अर्पित किया। भठली, मिस्दा, केसला सहित दर्जनों गांवों से श्रद्धालु पहुंचे और भजन-कीर्तन में शामिल हुए।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। थाना प्रभारी स्वयं बल के साथ दिनभर मौजूद रहे। इतनी बड़ी भीड़ के बावजूद मेले में कोई अप्रिय घटना नहीं घटी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दिशा-निर्देश, पार्किंग व्यवस्था और पानी जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया गया।
नागपंचमी पर्व पर दल्हा पहाड़ न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा, पौराणिक मान्यताओं और जन आस्था का भी भव्य प्रदर्शन देखने को मिला। श्रद्धा, व्यवस्था और परंपरा का यह संगम वास्तव में अनुकरणीय रहा।