1 सितंबर को रायपुर में गरजेंगी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाएं
शासकीय कर्मचारी का दर्जा और पोषण ट्रैकर ऐप सुधार की मांग
1 सितंबर को रायपुर में गरजेंगी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाएं
शासकीय कर्मचारी का दर्जा और पोषण ट्रैकर ऐप सुधार की मांग
जांजगीर-चांपा। जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं अब अपने हक और सम्मान की लड़ाई के लिए राज्यस्तर पर बड़ा आंदोलन करने जा रही हैं। पोषण ट्रैकर ऐप की लगातार तकनीकी खामियों, मानदेय, सुविधाओं और सरकारी उपेक्षा को लेकर 1 सितंबर 2025 को रायपुर के तूता मैदान में एक दिवसीय राज्य स्तरीय आंदोलन होगा। आंदोलन की सबसे बड़ी मांग है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को तत्काल शासकीय कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
पोषण ट्रैकर ऐप बना परेशानी का सबब
पोषण ट्रैकर ऐप की खामियों ने कार्यकर्ताओं का काम ठप कर दिया है। बार-बार वर्जन अपडेट, कमजोर नेटवर्क, फेस मिस-मैच जैसी तकनीकी समस्याओं के कारण डेटा अपलोड करने में घंटों लग रहे हैं। कई कार्यकर्ताओं को इस ऐप का सही संचालन सीखने का प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया।
संघ का कहना है कि योजनाओं को डिजिटल करने के नाम पर कार्यकर्ताओं पर बोझ बढ़ा दिया गया है। “टेक्नोलॉजी मददगार नहीं, सिरदर्द बन गई है,” संघ ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा।
तकनीकी और प्रशासनिक खामियों की पूरी लिस्ट
लाभार्थियों के खातों से राशि समय पर नहीं निकल रही।
मोबाइल से आधार लिंकिंग की समस्या।
पोषण आहार आपूर्ति में गड़बड़ियां।
कार्यकर्ताओं को तकनीकी साधन और सपोर्ट की भारी कमी।
ऐप के कारण कार्यकर्ताओं का समय और मेहनत दोगुनी।
मांगें जो आंदोलन की वजह बनीं
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं को शासकीय कर्मचारी का दर्जा।
सेवा समाप्ति पर 10 लाख रुपये की सम्मान निधि।
मेडिकल छुट्टी के दौरान भी मानदेय।
विभागीय ऋण, बीमा, पेंशन जैसी सुविधाओं का प्रावधान।
सभी केंद्रों में समय पर ईंधन राशि और सिलेंडर-चूल्हा।
आरटीई के कारण घटते बच्चों की संख्या पर ठोस नीति।
संघ के नेताओं के बयान
संघ की जांजगीर-चाम्पा जिला अध्यक्ष श्रीमती सविता कश्यप ने कहा,
“हम वर्षों से गांव-गांव जाकर कुपोषण मिटाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। लेकिन हमें कभी सरकारी कर्मचारी का सम्मान नहीं दिया गया। यह आंदोलन निर्णायक होगा।”जिला सचिव सावित्री दिनकर बोली,
“डिजिटलाइजेशन के नाम पर योजनाएं हम पर बोझ डाल रही हैं। ऐप की तकनीकी खामियों से कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट रहा है। सरकार को तुरंत कदम उठाना चाहिए।”जिला कोषाध्यक्ष श्रीमती रूखमणी साहू ने कहा,
“1 सितंबर को रायपुर के तूता मैदान में हजारों कार्यकर्ता-सहायिकाएं जुटेंगी। यह आंदोलन हमारे सम्मान और अधिकारों की लड़ाई है।”
आंदोलन की गूंज पूरे प्रदेश में
आंदोलन का यह ऐलान प्रदेशभर की कार्यकर्ता-सहायिकाओं के लिए नई उम्मीद का संदेश है। जांजगीर-चांपा से लेकर राज्य के हर जिले में इस आंदोलन को लेकर जोश देखा जा रहा है। संघ का कहना है कि यह प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं ग्रामीण स्वास्थ्य व पोषण योजनाओं की रीढ़ हैं। लेकिन लगातार बढ़ते कार्यभार, तकनीकी दिक्कतों और सम्मान की कमी से उनका मनोबल गिर रहा है। यह आंदोलन केवल एक वर्ग की मांग नहीं, बल्कि योजनाओं के भविष्य की चिंता भी है। अब देखना है कि सरकार इस आवाज को कितनी गंभीरता से लेती है।