“समाज कल्याण विभाग पर उठे सवाल, असली दिव्यांगों का हक मारने वालों पर कब होगी कार्रवाई?”
जांजगीर का पत्रकार बना फर्जी दिव्यांग: सालों से हड़प रहा चावल-पेंशन, दिव्यांग संघ का बड़ा आंदोलन तय
जांजगीर। जिले में फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, जांजगीर जिले का एक स्वयंभू पत्रकार वर्षों से फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र का सहारा लेकर शासन की योजनाओं का अनुचित लाभ उठा रहा है। यह कथित फर्जी दिव्यांग न केवल उचित मूल्य की दुकान से चावल प्राप्त कर रहा है, बल्कि ग्राम पंचायत से हर माह दिव्यांग पेंशन भी उठा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि समाज कल्याण विभाग ने इतने सालों में इस फर्जी लाभार्थी का सत्यापन क्यों नहीं किया? क्या विभाग का काम केवल कागजों पर योजनाएं चलाना है जबकि असली दिव्यांग अपने हक के लिए दर-दर भटक रहे हैं?
दिव्यांग संघ के तेवर तेज
प्रदेश दिव्यांग संघ ने इस मामले को गंभीर मानते हुए सोमवार को होने वाले जनदर्शन में कलेक्टर को शिकायत सौंपने का ऐलान किया है। संघ का कहना है कि खाद्य विभाग, समाज कल्याण विभाग और पुलिस विभाग में इस घोटाले की आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई जाएगी।
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। जिले में कई प्रभावशाली लोग भी इसी तरह जाली दस्तावेज बनाकर योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, आरोपी पत्रकार ने ग्राम पंचायत स्तर पर कूटरचना कर वर्षों से शासन का चावल, पेंशन और अन्य सुविधाओं का फायदा उठाया।
“असली दिव्यांगों का हक मारने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। यदि प्रशासन ने कार्रवाई में देर की, तो जिला मुख्यालय में बड़े आंदोलन की शुरुआत की जाएगी,” संघ ने यह भी स्पष्ट किया।
अगली कड़ी में खुलेंगे और राज
इस मामले की अगली कड़ी में पत्रकार की पहचान, उसका गांव और ग्राम पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष भी सार्वजनिक किया जाएगा। प्रशासनिक लापरवाही और जिम्मेदार पदाधिकारियों की भूमिका पर भी बड़ा खुलासा होने की संभावना है।
धाराएँ जो बन सकती हैं हथियार
इस गंभीर फर्जीवाड़े पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की कई धाराएँ लागू हो सकती हैं:
धारा 318 – धोखाधड़ी और छलपूर्वक लाभ उठाना (7 साल तक की सजा और जुर्माना)।
धारा 336 – कूटरचना कर लाभ लेना (7 साल तक की सजा)।
धारा 338 – जाली दस्तावेज का उपयोग करना (2 से 7 साल तक की सजा)।
धारा 61 – आपराधिक साजिश में शामिल सह-अपराधियों पर कार्रवाई।
इसके अलावा, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत भी कार्रवाई संभव है।
सिस्टम पर सीधा सवाल
यह मामला केवल एक व्यक्ति का फर्जीवाड़ा नहीं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही का बड़ा सबूत है। आखिर समाज कल्याण विभाग वर्षों तक ऐसे फर्जी लाभार्थियों को नजरअंदाज क्यों करता रहा? कब तक असली दिव्यांगों का हक छीना जाता रहेगा और कब तक सिस्टम लापरवाह बना रहेगा?
दस्तावेजों में चौंकाने वाली गड़बड़ी
सामाजिक सुरक्षा पेंशन के सैंक्शन ऑर्डर CG-S-02566104 में लाभार्थी की उम्र 62 वर्ष दर्ज है, जबकि निःशक्तजन अंत्योदय राशन कार्ड क्रमांक 223790132118 में उसी नाम और पिता के नाम के साथ उम्र 26 वर्ष दर्ज है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि जानबूझकर कूटरचना कर शासन की सुविधाओं का लाभ उठाया गया है।
अब सवाल यह है कि शासन जांच कर “दूध का दूध और पानी का पानी” करेगा या इस कथित पत्रकार को बचाने का प्रयास करेगा? यह मामला न केवल जिला बल्कि पूरे प्रदेश के लिए चेतावनी है।