समर्थन मूल्य धान खरीदी कंप्यूटर ऑपरेटरों की लंबित मांगें अब भी अधर में, 24 अक्टूबर को जिले में एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन
जांजगीर-चांपा। जिला सहकारी समिति कर्मचारी संघ एवं समर्थन मूल्य धान खरीदी कंप्यूटर ऑपरेटर संघ ने लंबित मांगों को लेकर 24 अक्टूबर 2025 को जिला स्तरीय एकदिवसीय ज्ञापन/धरना/रैली/प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। संघ का कहना है कि विगत कई वर्षों से बार-बार मांगें उठाने के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई, जिसके चलते कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।
संघ का दावा है कि मध्यप्रदेश की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी सहकारी समितियों के कर्मचारियों को वेतनमान और सुविधाएं मिलनी चाहिए, परंतु अब तक राज्य सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की है। धान खरीदी व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले कंप्यूटर ऑपरेटरों का कहना है कि किसान पंजीयन, खरीदी-तौल प्रक्रिया से लेकर भंडारण एवं भुगतान तक की पूरी व्यवस्था उन्हीं के कंधों पर टिकी रहती है, फिर भी इन्हें न्यूनतम सुविधा तक नहीं मिल रही।
संघ की चार सूत्रीय प्रमुख मांगें
मध्यप्रदेश सरकार के तर्ज पर वेतनमान
प्रदेश के 2058 सहकारी समिति कर्मचारियों को प्रतिवर्ष 3-3 लाख रुपये प्रबंधकीय अनुदान राशि शीघ्र स्वीकृत की जाए।
संविलियन व सेवा नियम में संशोधन
सहकारी सेवा नियम 2018 में लंबित संशोधन को लागू करते हुए पुरानी वेतनमान व्यवस्था को पुनः बहाल किया जाए।
धान खरीदी सीज़न के मानदेय में बढ़ोतरी
वर्ष 2023-24 एवं आगामी वर्ष 2024-25 तक धान परिवहन पश्चात हुई संपूर्ण सुरक्षित मान्यता, संरक्षण, खाद-बीज व फसल बीमा सहित अन्य मदों का खर्च जोड़ा जाए तथा राशन वितरण पर प्रति क्विंटल 500 ग्राम क्षतिपूर्ति/5000 रुपये तक की व्यवस्था की जाए।
आऊटसोर्सिंग के स्थान पर सीधी नियुक्ति
वर्ष 2024-25 की धान खरीदी नीति में धारा 11.3 के तहत आउटसोर्सिंग प्रथा समाप्त कर सीधे कंप्यूटर ऑपरेटरों की नियुक्ति सहकारी संस्थाओं के माध्यम से की जाए।
“वादा-विश्वास और इंतजार… अब निर्णायक चरण में” – संघ
संघ नेताओं का कहना है कि प्रदेश में किसानों के बाद यदि कोई सबसे बड़ी जिम्मेदारी निभाता है तो वह कंप्यूटर ऑपरेटर और समिति कर्मचारी ही हैं, फिर भी उन्हें अस्थायी श्रेणी में रखकर वर्षों से केवल आश्वासन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि आगामी दिनों में मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
प्रदेशभर में धान खरीदी का काउंटडाउन शुरू हो चुका है, ऐसे में सहकारी समितियों के ये कर्मचारी सरकार के लिए भी अनिवार्य कड़ी माने जाते हैं। लिहाजा यह देखना होगा कि प्रशासन इस एकदिवसीय प्रदर्शन के बाद क्या रुख अपनाता है।