स्टिंग ऑपरेशन में महेंद्र कुर्मी के बड़े खुलासे, सरपंच के ऑडियो ने खोली नई परतें
जनहित में हुए खुलासों के बाद दोनों पर BNS की गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज होने की स्थिति बनी
जांजगीर-चाम्पा। ग्राम पंचायत अंगारखार के भ्रष्टाचार प्रकरण की लगातार तीन कड़ियों के बाद अब चौथी कड़ी सबसे बड़ा खुलासा लेकर सामने आई है। cgkhabarnama.com की टीम द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन में महेंद्र कुर्मी स्वयं अपनी करतूतों को स्वीकार करता हुआ साफ सुनाई दे रहा है, जिससे पंचायत में वर्षों से चल रहे भ्रष्टाचार का चेहरा उजागर हो गया है।
इसके साथ ही सामने आए सरपंच के ऑडियो कॉल में उन्होंने स्पष्ट कहा है कि “महेंद्र कुर्मी और मुकेश लहरे पत्रकारों के बाप बने बैठे हैं, और पूरे पंचायत को यही दोनों परेशान कर रहे हैं।” सरपंच के इस बयान ने मामले को और गंभीर बना दिया है तथा पंचायत के अंदरूनी हालातों की हकीकत जनता तक पहुंच गई है।
स्टिंग खुलासे से बौखलाए महेंद्र कुर्मी की शिकायत
हमारे ऑडियो खुलासे के बाद तिलमिलाए महेंद्र कुर्मी ने थाने में यह कहकर शिकायत दी कि उनके निजता का हनन किया गया है। लेकिन कानूनी प्रावधानों में साफ उल्लेख है कि— “यदि जनहित में भ्रष्टाचार उजागर करने के लिए ऑडियो/वीडियो जारी किया जाता है और उससे समाज का भला होता है, तो यह किसी भी प्रकार से निजता का उल्लंघन नहीं माना जाता।”
ऐसे में महेंद्र कुर्मी की शिकायत खुद ही निरर्थक साबित हो रही है, क्योंकि अब तक उनके और मुकेश लहरे के जिन भी कारनामों का खुलासा हुआ है, वे सभी जनहित में आवश्यक थे। इन दोनों पर BNS की कई धाराओं में प्रकरण बनता है
महेंद्र कुर्मी और मुकेश लहरे पर लागू होने वाली संभावित BNS की धाराएं
अब तक सामने आए सबूतों और ऑडियो में स्वयं की स्वीकारोक्ति के बाद, महेंद्र कुर्मी और मुकेश लहरे पर BNS की अलग-अलग धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध होना तय माना जा रहा है। नीचे वे प्रमुख भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं दी जा रही हैं, जिनके अंतर्गत इन दोनों पर प्रकरण बन सकता है –
1. BNS धारा 318 — धोखाधड़ी, पंचायत कार्यों में गलत तथ्य प्रस्तुत करना, लाभ लेना, या दूसरों को ग़लत रास्ते से लाभ दिलाना।
2. BNS धारा 324 — आपराधिक विश्वासघात- पंचायत के संसाधनों का दुरुपयोग, कार्यों में अनियमितता, या सार्वजनिक धन/संपत्ति का गलत इस्तेमाल।
3. BNS धारा 336 — जबरन वसूली, दबाव बनाना- पंचायत में अपना दबदबा बनाकर अधिकारियों, सरपंच या ग्रामीणों पर दबाव बनाना।
4. BNS धारा 351 — भ्रष्टाचार व अनुचित लाभ लेने का अपराध- आर्थिक लाभ के लिए पद/प्रभाव का दुरुपयोग।
5. BNS धारा 184(3) — सरकारी कार्य में बाधा पहुँचाना- पंचायत के नियमित कार्यों में बाधा डालना, कर्मचारियों को धमकाना या काम रुकवाना।
6. BNS धारा 493 — आपराधिक षड्यंत्र- मिलकर भ्रष्टाचार करना, योजनाबद्ध तरीके से पंचायत को नुकसान पहुँचाना।
7. BNS धारा 356 — आपराधिक धमकी- सरपंच, सचिव या शिकायतकर्ताओं को डराकर चुप कराने का प्रयास।
स्टिंग ऑपरेशन में स्वयं स्वीकारोक्ति, सरपंच का बयान, और लगातार उजागर हुए कारनामों के आधार पर महेंद्र कुर्मी और मुकेश लहरे पर BNS की उपरोक्त धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध होना पूर्णतः संभव है। जिले के उच्चाधिकारियों द्वारा संज्ञान लेने के बाद जनपद कार्यालय जल्द ही जांच टीम गठित कर सकता है, जिससे दोनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।
विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जिले के उच्चाधिकारियों ने इस पूरे मामले का संज्ञान ले लिया है, और जनपद कार्यालय से इस प्रकरण पर जल्द ही एक जांच टीम गठित की जाने की तैयारी है।
पूरे प्रकरण पर संज्ञान लेते हुए जिला पंचायत सीईओ गोकुल रावटे ने कहा है कि “जनपद CEO से जांच रिपोर्ट मांगी गई है”