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कार्यक्रम प्रबंधक पर मानसिक प्रताड़ना और भेदभाव का आरोप, इंजीनियर ने राज्य अनुसूचित जाति आयोग में दर्ज कराई शिकायत

6 करोड़ के उपकरण खरीद में गड़बड़ी का आरोप, निम्न क्वालिटी की सामग्री ऊंचे दर पर खरीद, सत्यापन के लिए दबाव भी!

कार्यक्रम प्रबंधक पर मानसिक प्रताड़ना और भेदभाव का आरोप, इंजीनियर ने राज्य अनुसूचित जाति आयोग में दर्ज कराई शिकायत

6 करोड़ के उपकरण खरीद में गड़बड़ी का आरोप, निम्न क्वालिटी की सामग्री ऊंचे दर पर खरीद, सत्यापन के लिए दबाव भी!

एनएचएम जांजगीर-चांपा के जिला कार्यक्रम प्रबंधक पर गंभीर आरोप, बायो मेडिकल इंजीनियर ने राज्य अनुसूचित जाति आयोग से की जांच की मांग, मानसिक प्रताड़ना और भेदभाव का भी मुद्दा उठाया

जांजगीर-चांपा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) जांजगीर-चांपा में पदस्थ बायो मेडिकल इंजीनियर ने जिला कार्यक्रम प्रबंधक पर गंभीर वित्तीय अनियमितता के साथ-साथ मानसिक उत्पीड़न, जातिगत भेदभाव और दबाव बनाकर जबरन गलत कार्य करवाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इंजीनियर ने यह शिकायत छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जाति आयोग में दर्ज कराई है, जिसमें वर्ष 2024-25 में लगभग 6 करोड़ रुपये के चिकित्सकीय उपकरणों की संदिग्ध खरीद को प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाया गया है।

शिकायत के अनुसार जिला कार्यक्रम प्रबंधक द्वारा सीएसआर मद एवं अन्य मदों से बड़ी रकम खर्च कर विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के लिए चिकित्सकीय उपकरण खरीदे गए। आरोप है कि यह खरीद “मनचाहे फॉर्म से” की गई तथा उपकरण निम्न गुणवत्ता स्तर के होने के बावजूद अत्यधिक ऊंचे दरों पर खरीदे गए। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि इस संपूर्ण खरीद प्रक्रिया को वैध ठहराने और दस्तावेजों के सत्यापन के लिए उन पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है, ताकि गड़बड़ी पर पर्दा डाला जा सके।

इंजीनियर ने बताया कि वह वर्ष 2022 से अपनी सेवाएं दे रहे हैं और नियमित रूप से उपकरणों के रखरखाव, निरीक्षण तथा तकनीकी सहयोग का कार्य ईमानदारी से कर रहे हैं। इसके बावजूद उनके कार्य में बाधा डालने, बिना आधार के नोटिस जारी करने, टिप्पणी दर्ज कर मानसिक दबाव बनाने और उन्हें बदनाम करने का प्रयास लगातार किया जा रहा है। साथ ही एचआरएमआईएस प्रविष्टि, वेतनमान और अन्य प्रशासनिक कार्यों में भी जानबूझकर अड़चन पैदा करने का आरोप लगाया गया है।

शिकायतकर्ता ने आयोग से मांग की है कि 6 करोड़ रुपये के उपकरण क्रय प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, खरीद प्रक्रिया की वास्तविकता सामने लाई जाए तथा मानसिक उत्पीड़न एवं भेदभाव से मुक्ति दिलाई जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि इस प्रकरण के कारण उनके साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी।

फिलहाल मामला राज्य अनुसूचित जाति आयोग तक पहुंच चुका है, जहां से जल्द जांच शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। जिले के स्वास्थ्य महकमे में इस शिकायत के सामने आने के बाद चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

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