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किरोड़ीमल कालोनी हुआ राममय,श्री राम की भक्ति में डूबे श्रद्धालु

अखंड रामायण पाठ का हुआ भव्य आयोजन

किरोड़ीमल कालोनी हुआ राममय,श्री राम की भक्ति में डूबे श्रद्धालु

अखंड रामायण पाठ का हुआ भव्य आयोजन

रायगढ़/ एक ओर जहां नववर्ष के स्वागत में शहर भर में विविध रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, वहीं स्थानीय किरोड़ीमल कॉलोनी स्थित हनुमान मंदिर में नववर्ष के आगमन को भारतीय परंपरा और धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाने की एक सशक्त परंपरा बीते 28 वर्षों से निरंतर निभाई जा रही है। पूर्व विधायक स्वर्गीय रोशनलाल अग्रवाल की प्रेरणा से वर्ष 1998 में शुरू हुई यह परंपरा आज भी पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ जारी है। इसी कड़ी में इस वर्ष भी मोहल्लेवासियों के सामूहिक सहयोग से अखंड रामायण पाठ का भव्य आयोजन संपन्न हुआ।

24 घंटे चला अखंड रामायण पाठ

गौरतलब हो कि स्थानीय किरोड़ीमल कॉलोनी में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान लगातार 24 घंटों तक अखंड रामायण पाठ का आयोजन किया गया। सुप्रसिद्ध पंडितों द्वारा श्रीराम कथा का सस्वर वाचन किया गया, जिसे सुनने के लिए मोहल्लेवासियों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं के लिए जलपान की समुचित व्यवस्था भी आयोजकों द्वारा की गई थी।अखंड रामायण पाठ के समापन के पश्चात् विधिवत प्रसाद वितरण किया गया। इसके बाद छोटे बच्चों द्वारा प्रस्तुत मधुर भजनों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। बच्चों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम की भक्ति में भाव-विभोर कर दिया।

भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने का संदेश

उल्लेखनीय है कि वर्तमान समय में नववर्ष के अवसर पर कई स्थानों पर पाश्चात्य संस्कृति से जुड़े आयोजनों के साथ-साथ युवा वर्ग में नशे जैसी कुरीतियां भी देखने को मिलती हैं। ऐसे में स्वर्गीय रोशनलाल अग्रवाल की प्रेरणा से प्रारंभ किया गया यह अखंड रामायण पाठ का आयोजन एक सकारात्मक सामाजिक संदेश देता है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य नववर्ष को भारतीय धार्मिक परंपराओं के अनुरूप मनाते हुए युवाओं को गलत लतों से दूर रहने और संस्कारों से जुड़ने की प्रेरणा देना रहा है।

प्रेरणादायक परंपरा

किरोड़ीमल कॉलोनी में विगत 28 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रहा यह अखंड रामायण पाठ न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक समरसता और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का भी सशक्त उदाहरण है। नववर्ष के अवसर पर इस तरह के धार्मिक आयोजनों में सहभागिता से जहां युवाओं का मनोबल बढ़ता है, वहीं समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सद्भाव का वातावरण भी निर्मित होता है।

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