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खंड चिकित्सा अधिकारी कोटा के विरुद्ध 8 बिंदुओं की जांच ठप, अमान्य समिति पर उठे सवाल

दोषी को संरक्षण देने के आरोप, 10 माह बीतने के बाद भी कलेक्टर को नहीं सौंपी गई जांच रिपोर्ट

खंड चिकित्सा अधिकारी कोटा के विरुद्ध 8 बिंदुओं की जांच ठप, अमान्य समिति पर उठे सवाल

दोषी को संरक्षण देने के आरोप, 10 माह बीतने के बाद भी कलेक्टर को नहीं सौंपी गई जांच रिपोर्ट

बिलासपुर। खंड चिकित्सा अधिकारी कोटा डॉ. एन. के. गुप्ता के विरुद्ध दर्ज 8 बिंदुओं की गंभीर शिकायतों की जांच प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्ता द्वारा आरोप लगाया गया है कि दोषी अधिकारी को बचाने की मंशा से अमान्य एवं अस्पष्ट जांच समिति का गठन कर जांच को निरस्त कर दिया गया, जबकि विधिवत एवं निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार डॉ. एन. के. गुप्ता के विरुद्ध वित्तीय अनियमितता, एक आरएमए द्वारा स्वयं के नाम से अवैध रूप से एंबुलेंस संचालन में संरक्षण, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोटा में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 द्वारा अवैध क्लिनिक संचालन, एसडीएम द्वारा क्लिनिक सील किए जाने के बावजूद कार्यवाही न करना, अस्पताल परिसर में वार्डबॉय एवं स्वीपर द्वारा अश्लील नृत्य-गान की घटना पर कार्रवाई न करना सहित कुल 8 बिंदुओं पर कलेक्टर को शिकायत दर्ज कराई गई थी।

कलेक्टर द्वारा आरोपों की गंभीरता को देखते हुए 20 मार्च 2025 को संभागीय संयुक्त संचालक को 15 दिवस के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद लगभग एक माह बाद 24 अप्रैल 2025 को संयुक्त संचालक द्वारा एक अस्पष्ट जांच समिति का गठन किया गया। समिति में डॉ. गायत्री बांधी (प्रभारी जिला स्वास्थ्य सह परिवार कल्याण अधिकारी, बिलासपुर) को अध्यक्ष तथा डॉ. सुमन आर्या, डॉ. उमेश साहू (खंड चिकित्सा अधिकारी, तखतपुर) और श्रीमती शमीना खान (सहायक ग्रेड-2) को सदस्य बनाया गया।

शिकायतकर्ता रविंद्र तिवारी का आरोप है कि इस समिति द्वारा जांच के नाम पर औपचारिकता निभाई गई और लगभग 10 माह बीत जाने के बावजूद अब तक कोई भी जांच रिपोर्ट कलेक्टर को प्रस्तुत नहीं की गई है। इसे दोषी अधिकारी को संरक्षण देने की मंशा से गठित अमान्य समिति बताया जा रहा है।

इसके अतिरिक्त आरोप लगाया गया है कि अवैध क्लिनिक संचालन में दोष सिद्ध होने के बावजूद संबंधित लिपिक के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि उसे पदोन्नत कर सहायक ग्रेड-2 के पद पर पदस्थ कर दिया गया।

शिकायतकर्ता द्वारा उक्त अमान्य, असंवैधानिक एवं अस्पष्ट जांच प्रक्रिया को निरस्त करने, जांच समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा निष्पक्ष जांच के लिए सुस्पष्ट एवं वैधानिक जांच समिति गठित करने की मांग की गई है। इस संबंध में संयुक्त संचालक को पत्र प्रस्तुत करते हुए माननीय सचिव स्वास्थ्य, आयुक्त स्वास्थ्य सेवाएं, संभागायुक्त एवं कलेक्टर को भी दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई हेतु अनुरोध पत्र प्रेषित किया गया है।

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