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समाज कल्याण विभाग में खाली कुर्सी बनी चिंता का कारण, उप संचालक की अनुपस्थिति से व्यवस्था प्रभावित

कार्यालय खुला, पर जिम्मेदार अधिकारी नदारद, कार्य प्रभावित, दिव्यांगजनों को करना पड़ रहा इंतजार

समाज कल्याण विभाग में खाली कुर्सी बनी चिंता का कारण, उप संचालक की अनुपस्थिति से व्यवस्था प्रभावित

कार्यालय खुला, पर जिम्मेदार अधिकारी नदारद, कार्य प्रभावित, दिव्यांगजनों को करना पड़ रहा इंतजार

जांजगीर-चांपा। समाज कल्याण विभाग की विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। उप संचालक की लगातार अनुपस्थिति के कारण कार्यालय की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है, जिससे आमजन को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, समाज कल्याण विभाग का कार्यालय नियमित रूप से खुलता तो है, लेकिन उप संचालक की कुर्सी अधिकांश समय खाली ही देखी जाती है। कार्यालय पहुंचने वाले लोग बताते हैं कि जरूरी कार्यों के लिए कई बार आने के बावजूद उन्हें संबंधित अधिकारी नहीं मिल पाते।

बताया जा रहा है कि विभागीय कार्यों में निर्णय लेने और फाइलों के निराकरण के लिए उप संचालक की उपस्थिति आवश्यक होती है। ऐसे में उनकी अनुपस्थिति के कारण कई महत्वपूर्ण कार्य लंबित हो रहे हैं और प्रक्रिया में देरी हो रही है।

दिव्यांगजनों पर पड़ रहा सीधा असर

समाज कल्याण विभाग से संचालित योजनाओं का लाभ लेने के लिए बड़ी संख्या में दिव्यांगजन कार्यालय पहुंचते हैं। लेकिन अधिकारी के अभाव में उन्हें अपने कार्यों के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। कई मामलों में उन्हें बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ रही है।

सूत्रों के अनुसार, विभाग में वैकल्पिक व्यवस्था या जिम्मेदारी का स्पष्ट बंटवारा नहीं होने के कारण स्थिति और जटिल हो गई है। इससे कार्यों के निष्पादन में अनिश्चितता बनी हुई है।

फिलहाल, विभागीय स्तर पर इस स्थिति को लेकर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। अब यह देखना होगा कि संबंधित अधिकारी और प्रशासन इस व्यवस्था को सुधारने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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