127 दिन की छुट्टी, दो-दो पत्र और वेतन आहरण का रहस्य: जांच की धार पर टिका पूरा मामला
एक पत्र में अवकाश स्वीकृत, दूसरे में साफ इनकार, हस्ताक्षरों में भी बड़ा अंतर, विभाग में चर्चाओं का बाजार गर्म
नोटिस के बाद खुली परतें, अब कलेक्टर की जांच रिपोर्ट पर टिकी आगे की कार्रवाई
जांजगीर-चांपा। समाज कल्याण विभाग से जुड़े 127 दिनों के अवकाश और वेतन आहरण के मामले में अब एक नया मोड़ सामने आया है। पहले जहां मामला जांच के इंतजार में ठहरा हुआ था, वहीं अब दो अलग-अलग पत्रों के सामने आने से पूरे प्रकरण ने और गंभीर रूप ले लिया है। विभागीय गलियारों में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और कई नए सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उपसंचालक श्रीमती बरखा मिहिर के अवकाश स्वीकृति को लेकर कार्यालय संयुक्त संचालक, समाज कल्याण रायपुर के दो अलग-अलग पत्र सामने आए हैं। इन दोनों पत्रों में न केवल तथ्य अलग-अलग हैं, बल्कि हस्ताक्षरों में भी जमीन-आसमान का अंतर बताया जा रहा है।
एक पत्र दिनांक 23 दिसंबर 2025 का है, जिसमें अवकाश स्वीकृत होने की बात कही गई है। इसी पत्र के आधार पर कोषालय में प्रस्तुत कर वेतन आहरण किया गया। हालांकि इस पत्र की लिखावट में कई त्रुटियां बताई जा रही हैं और इसे विभागीय अमले द्वारा संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है।
वहीं दूसरा पत्र 09 जनवरी 2026 का है, जिसमें स्पष्ट रूप से अवकाश स्वीकृत नहीं होने की बात लिखी गई है। इस पत्र को विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों के बीच अधिक विश्वसनीय माना जा रहा है। दोनों पत्रों में तत्कालीन संयुक्त संचालक अरविंद गेडाम के हस्ताक्षरों में भी स्पष्ट अंतर होने की चर्चा है, जिससे मामला और उलझ गया है।
सूत्रों के अनुसार, यदि दूसरे पत्र को सही माना जाए तो यह स्थिति बनती है कि अवकाश स्वीकृति के बिना ही वेतन आहरण किया गया। ऐसे में कोषालय अधिकारियों को कथित रूप से गलत जानकारी देकर वेतन निकालने की आशंका जताई जा रही है। वहीं यदि पहले पत्र को सही माना जाता है, तो विभाग के भीतर उठ रही आपत्तियां और चर्चाएं गलत साबित हो सकती हैं।
गौरतलब है कि जनवरी के पहले सप्ताह में जैसे ही वेतन आहरण हुआ, उसके तुरंत बाद ही पत्र की प्रामाणिकता पर सवाल उठे और कूटरचना की आशंका के चलते 07 जनवरी 2026 को संचालक, समाज कल्याण द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसी के बाद पूरे मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं।
इस पूरे प्रकरण पर संचालक समाज कल्याण श्रीमती रोक्तिमा यादव ने दूरभाष पर स्पष्ट किया है कि मामले की विस्तृत जांच कलेक्टर जांजगीर-चांपा को सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि अवकाश स्वीकृति से संबंधित दस्तावेजों में कूटरचना कर वेतन आहरित किया गया है, तो यह मामला गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है। फिलहाल पूरा मामला जांच रिपोर्ट पर निर्भर है और प्रशासनिक निर्णय उसी के आधार पर लिया जाएगा।
अब सबकी नजरें कलेक्टर की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाएगी और तय करेगी कि आखिर 127 दिनों की छुट्टी और वेतन आहरण के पीछे वास्तविक स्थिति क्या थी।