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जिंदल पेंथर सरिया की एजेंसी दिलाने के नाम पर 4.64 लाख की ऑनलाइन ठगी

वेबसाइट से मिले नंबर पर संपर्क के बाद बैंक खाते में कराया भुगतान, रकम ट्रांसफर होते ही मोबाइल बंद; पांच माह बाद भी आरोपी गिरफ्त से दूर

जिंदल पेंथर सरिया की एजेंसी दिलाने के नाम पर 4.64 लाख की ऑनलाइन ठगी

वेबसाइट से मिले नंबर पर संपर्क के बाद बैंक खाते में कराया भुगतान, रकम ट्रांसफर होते ही मोबाइल बंद; पांच माह बाद भी आरोपी गिरफ्त से दूर

 

जांजगीर-चांपा। जिंदल पेंथर सरिया की एजेंसी दिलाने के नाम पर चांपा-सिवनी क्षेत्र के फ्लाई एश ब्रिक्स संचालक लक्ष्मण साहू से 4 लाख 64 हजार रुपये की ऑनलाइन ठगी का मामला सामने आया है। शिकायत के अनुसार, इंटरनेट पर उपलब्ध वेबसाइट के माध्यम से संपर्क में आए कथित व्यक्ति ने एजेंसी और सरिया की खरीद-बिक्री के संबंध में जानकारी देकर सामान खरीदने के नाम पर पंजाब नेशनल बैंक के एक खाते में रकम जमा कराई। राशि ट्रांसफर होने के बाद संबंधित मोबाइल नंबर बंद हो गया। मामले में पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू की थी, लेकिन शिकायत के करीब पांच महीने बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

जानकारी के अनुसार, चांपा-सिवनी निवासी लक्ष्मण साहू कान्हा फ्लाई एश ब्रिक्स का संचालन करते हैं। जिंदल पेंथर सरिया की एजेंसी लेने के उद्देश्य से उन्होंने इंटरनेट पर उपलब्ध वेबसाइट के जरिए संपर्क नंबर प्राप्त किया। इसके बाद उक्त मोबाइल नंबर पर संबंधित व्यक्ति से बातचीत हुई। शिकायत के मुताबिक, बातचीत के दौरान उन्हें सरिया की एजेंसी तथा सामान की खरीद-बिक्री से संबंधित जानकारी दी गई।

बताया गया है कि बातचीत के बाद लक्ष्मण साहू ने संबंधित व्यक्ति पर भरोसा करते हुए सामान खरीदने के लिए उसके द्वारा बताए गए पंजाब नेशनल बैंक के खाते में 7 मार्च 2026 को 4 लाख 64 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए। राशि जमा करने के बाद जब उन्होंने सामान की आपूर्ति और आगे की प्रक्रिया के संबंध में संबंधित व्यक्ति से संपर्क करने का प्रयास किया तो मोबाइल नंबर बंद मिला।

काफी प्रयास के बाद भी संपर्क नहीं होने पर लक्ष्मण साहू को ठगी की आशंका हुई। इसके बाद उन्होंने बैंक लेन-देन से संबंधित दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध जानकारी के साथ 29 मार्च 2026 को पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की।

बैंक खाते के लेन-देन की जांच अहम

मामले में 4.64 लाख रुपये जिस बैंक खाते में जमा किए गए, उसके बाद रकम कहां-कहां ट्रांसफर हुई, इसकी जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके अलावा संबंधित मोबाइल नंबर किसके नाम पर पंजीकृत था, उसका उपयोग किस व्यक्ति द्वारा किया जा रहा था तथा वेबसाइट पर उपलब्ध संपर्क नंबर का वास्तविक संचालन कौन कर रहा था, इसकी तकनीकी जांच भी मामले में अहम हो सकती है।

ऑनलाइन व्यापारिक ठगी के मामलों में कई बार जालसाज प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम, ब्रांड और व्यापारिक गतिविधियों का इस्तेमाल कर लोगों को विश्वास में लेते हैं। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि जिस वेबसाइट अथवा ऑनलाइन माध्यम से संपर्क नंबर प्राप्त हुआ, उसका संबंधित कंपनी से वास्तविक संबंध था अथवा नहीं।

पांच माह बाद भी गिरफ्तारी नहीं

शिकायत दर्ज हुए करीब पांच माह बीत चुके हैं, लेकिन अब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से पीड़ित पक्ष में निराशा है। पीड़ित का कहना है कि पुलिस को बैंक खाते में किए गए ऑनलाइन ट्रांजैक्शन सहित अन्य जानकारी उपलब्ध कराई गई है। ऐसे में बैंक खाते की ट्रांजैक्शन हिस्ट्री, रकम के आगे हुए लेन-देन और मोबाइल नंबर की तकनीकी जांच के माध्यम से आरोपी तक पहुंचने की उम्मीद है।

मामले में पुलिस की जांच अब तक किस स्तर तक पहुंची है और आरोपी की पहचान के संबंध में क्या जानकारी सामने आई है, यह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। पीड़ित पक्ष ने पुलिस से मामले की बैंकिंग और तकनीकी पहलुओं से जांच करते हुए रकम की बरामदगी तथा आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है।

एसपी बोले- नए सिरे से जांच कर आरोपी तक पहुंचने का प्रयास

इस संबंध में पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय ने कहा कि मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। अब एक बार फिर नए सिरे से मामले की जांच शुरू करवाकर आरोपी तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा।

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