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तिफरा के दिव्यांग विद्यालय में चोरी का सिलसिला, सीसीटीवी साक्ष्यों के बावजूद कार्रवाई ठप

एसी और तखत चोरी के मामलों में कर्मचारियों की संलिप्तता उजागर, एफआईआर के निर्देश के बाद भी कार्रवाई नहीं

तिफरा के दिव्यांग विद्यालय में चोरी का सिलसिला, सीसीटीवी साक्ष्यों के बावजूद कार्रवाई ठप

एसी और तखत चोरी के मामलों में कर्मचारियों की संलिप्तता उजागर, एफआईआर के निर्देश के बाद भी कार्रवाई नहीं

 

बिलासपुर : तिफरा स्थित शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में लगातार चोरी की घटनाओं ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते महीनों में सामने आए दो प्रमुख मामलों में विद्यालय के भीतर ही कार्यरत कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई है, वहीं उच्च अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।

जानकारी के अनुसार, तिफरा स्थित इस आवासीय विद्यालय में 1 अक्टूबर को अधीक्षक कक्ष में लगा एयर कंडीशनर चोरी हो गया था। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि तत्कालीन प्रभारी वार्डन एवं शिक्षक देवेंद्र चंद्रा ने श्रमिक सदानंद रजक के साथ मिलकर एसी को अपने घर ले जाया था। बाद में अधिकारियों की फटकार के बाद एसी को वापस विद्यालय लाया गया।

इसके बाद 27 दिसंबर को एक और चोरी की घटना सामने आई, जिसमें विद्यालय परिसर से तखत गायब हो गया। जांच में पाया गया कि कलेक्टर दर पर कार्यरत कर्मचारी रामेश्वर निर्मलकर ने दो श्रमिकों सदानंद रजक और राजू निर्मलकर के साथ मिलकर तखत को अपने घर ले गया था। मामले की जानकारी मिलने पर तत्कालीन अधीक्षक बबीता कमलेश ने दोनों श्रमिकों को सेवा से बाहर कर दिया, जबकि मुख्य आरोपी पर कार्रवाई लंबित रही।

पूरे प्रकरण में प्रशासनिक अधीक्षक प्रदीप शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने चोरी की घटनाओं की जानकारी उच्च अधिकारियों को समय पर नहीं दी और मामले को दबाने का प्रयास किया। हालांकि, उनका कहना है कि तखत गायब होने की जानकारी मिलने पर संबंधित कर्मचारी को वापस करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस बीच, विद्यालय में रह रहे विशेष बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यह एक आवासीय विद्यालय है, जहां दृष्टि एवं श्रवण बाधित छात्र-छात्राएं निवास करते हैं। लगातार हो रही घटनाओं से सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता बढ़ गई है।

उल्लेखनीय है कि 30 मार्च 2026 को अधीक्षक द्वारा संयुक्त संचालक, समाज कल्याण विभाग, बिलासपुर को पूरे मामले की विस्तृत जानकारी सीसीटीवी फुटेज सहित भेजी गई थी। इसके आधार पर 9 अप्रैल 2026 को संयुक्त संचालक ने संबंधित आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके, अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

प्रकरण में प्रशासनिक अधीक्षक प्रदीप शर्मा एवं कार्यालय सहायक वर्ग-3 श्रीमती उमा पांडेय द्वारा निर्देशों के अनुपालन में देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल मामला लंबित है और आगे की कार्रवाई की प्रतीक्षा की जा रही है।

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