12 रेलवे पुलों पर हाईटेक निगरानी, खतरे का जलस्तर बढ़ते ही अफसरों के मोबाइल पर पहुंचेगा अलर्ट
बिलासपुर जोन ने मानसून में रेल पुलों की सुरक्षा के लिए लगाया सेंसर आधारित रियल-टाइम वाटर लेवल मॉनीटरिंग सिस्टम

12 रेलवे पुलों पर हाईटेक निगरानी, खतरे का जलस्तर बढ़ते ही अफसरों के मोबाइल पर पहुंचेगा अलर्ट
बिलासपुर जोन ने मानसून में रेल पुलों की सुरक्षा के लिए लगाया सेंसर आधारित रियल-टाइम वाटर लेवल मॉनीटरिंग सिस्टम
बिलासपुर। मानसून के दौरान रेलवे पुलों की सुरक्षा और रेल परिचालन को सुरक्षित बनाए रखने के लिए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के बिलासपुर जोन ने महत्वपूर्ण पहल की है। जोन के 12 प्रमुख रेलवे पुलों पर आधुनिक सेंसर आधारित रियल-टाइम वाटर लेवल मॉनीटरिंग सिस्टम स्थापित किया गया है। इस तकनीक के माध्यम से नदी के जलस्तर की 24 घंटे निगरानी की जा रही है। जलस्तर पूर्व निर्धारित चेतावनी या खतरे के स्तर तक पहुंचते ही संबंधित अधिकारियों के मोबाइल फोन पर तत्काल एसएमएस अलर्ट पहुंच जाएगा।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शेख समी उर रहमान ने बताया कि अत्याधुनिक सेंसर आधारित प्रणाली मानसून के दौरान रेलवे पुलों के आसपास जलस्तर की लगातार और सटीक निगरानी करने में सक्षम है। इससे जलस्तर में अचानक होने वाले बदलाव की जानकारी समय रहते अधिकारियों और इंजीनियरों तक पहुंच सकेगी। उन्होंने बताया कि यह प्रणाली सुरक्षित एवं निर्बाध रेल परिचालन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
पहले मैनुअल मीटर गेज से होती थी निगरानी
अब तक रेलवे पुलों के आसपास नदियों के जलस्तर का आकलन पारंपरिक मीटर गेज प्रणाली के माध्यम से किया जाता था। इसमें जलस्तर की मैनुअल रीडिंग लेने की आवश्यकता होती थी। अचानक बारिश होने या नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि की स्थिति में सूचना अधिकारियों तक पहुंचने में समय लग सकता था। इसके अलावा मैनुअल रीडिंग में मानवीय त्रुटि की संभावना भी बनी रहती थी। नई सेंसर आधारित प्रणाली से इस प्रक्रिया को अधिक तेज और स्वचालित बनाया गया है। सेंसर लगातार जलस्तर पर नजर रखता है और महत्वपूर्ण बदलाव होने पर संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना तत्काल उपलब्ध कराता है।
ट्रैक मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़ी है व्यवस्था
रेलवे द्वारा स्थापित यह आधुनिक वाटर लेवल मॉनीटरिंग सिस्टम ट्रैक मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़ा हुआ है। पुलों पर लगे सेंसर जलस्तर की लगातार निगरानी करते हैं। जैसे ही नदी का जलस्तर निर्धारित चेतावनी अथवा खतरे के स्तर तक पहुंचता है, सिस्टम स्वतः संबंधित अधिकारियों और इंजीनियरों के मोबाइल फोन पर एसएमएस अलर्ट भेज देता है। इससे अधिकारियों को स्थिति का तत्काल पता चल जाता है और आवश्यकता के अनुसार रेल परिचालन से संबंधित सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं।
ADEN और PWI समेत अधिकृत अधिकारियों को मिलेगा अलर्ट
सिस्टम में संबंधित सहायक मंडल अभियंता (ADEN), रेल पथ निरीक्षक (PWI) सहित अन्य अधिकृत अधिकारियों के मोबाइल नंबर पंजीकृत किए गए हैं। जलस्तर में होने वाले प्रत्येक महत्वपूर्ण बदलाव की सूचना निर्धारित अधिकारियों तक पहुंचती है। इससे मौके की स्थिति का तेजी से आकलन करने और आवश्यक कार्रवाई करने में सुविधा होगी।
हसदेव नदी के पुलों पर भी विशेष निगरानी
वर्तमान मानसून में कोरबा जिले में स्थित मिनीमाता हसदेव बांगो बांध का जलस्तर 94 प्रतिशत तक पहुंचने और लगातार बारिश के चलते बांध से पानी की निकासी की जा रही है। बांध के 9 गेट खोलकर लगभग 41 हजार से 49 हजार क्यूसेक पानी हसदेव नदी में छोड़े जाने की स्थिति में हसदेव नदी के जलस्तर पर भी रेलवे द्वारा विशेष निगरानी रखी जा रही है।
जांजगीर-चांपा जिले में नैला-चांपा स्टेशनों के बीच हसदेव नदी पर स्थित रेलवे पुल क्रमांक 46 डाउन तथा जयरामनगर-अकलतरा स्टेशनों के बीच रेलवे पुल क्रमांक 12 मिडिल पर जलस्तर की निगरानी महत्वपूर्ण है। इन पुलों पर स्थापित आधुनिक सेंसर आधारित रियल-टाइम वाटर लेवल मॉनीटरिंग सिस्टम के माध्यम से जलस्तर में होने वाले बदलाव की जानकारी लगातार उपलब्ध हो रही है।
समय पर मिलेगी सूचना, सुरक्षा उपाय होंगे आसान
मानसून के दौरान नदियों में अचानक पानी बढ़ने की स्थिति में रेलवे पुलों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है। रियल-टाइम मॉनीटरिंग सिस्टम से जलस्तर की जानकारी तत्काल मिलने के कारण रेलवे के संबंधित अधिकारी समय रहते आवश्यक सुरक्षा उपाय कर सकेंगे। इससे पुलों की निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के साथ ही सुरक्षित रेल परिचालन में भी मदद मिलेगी।




