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प्राचार्य की कृपा से शिक्षक बने बाबू! न पढ़ाने का झंझट, न समय पर कक्षा में आने की परेशानी

कोसमंदा स्कूल में सहायक शिक्षक विज्ञान एलबी महेंद्र सिदार की भूमिका पर सवाल; छात्रों के अनुसार विज्ञान की कक्षाओं से दूरी, फीस-छात्रवृत्ति के काम में संभाल रहे कार्यालयीन जिम्मेदारी

प्राचार्य की कृपा से शिक्षक बने बाबू! न पढ़ाने का झंझट, न समय पर कक्षा में आने की परेशानी

कोसमंदा स्कूल में सहायक शिक्षक विज्ञान एलबी महेंद्र सिदार की भूमिका पर सवाल; छात्रों के अनुसार विज्ञान की कक्षाओं से दूरी, फीस-छात्रवृत्ति के काम में संभाल रहे कार्यालयीन जिम्मेदारी

 

जांजगीर-चाम्पा। जिले के बलौदा विकासखण्ड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कोसमंदा में सहायक शिक्षक विज्ञान एलबी महेंद्र सिदार की भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। विद्यालय के छात्रों से मिली जानकारी के अनुसार विज्ञान विषय के शिक्षक के रूप में पदस्थ महेंद्र सिदार नियमित रूप से किसी कक्षा में विज्ञान का अध्यापन नहीं कराते। इसके बजाय वे विद्यालय में फीस, छात्रवृत्ति सहित अन्य कार्यालयीन एवं वित्तीय कार्यों में लिपिक की तरह जिम्मेदारी निभाते हैं।

मामले में सबसे अधिक चर्चा विद्यालय में तैयार की गई अध्यापन समय-सारणी को लेकर है। छात्रों से मिली जानकारी के अनुसार समय-सारणी में महेंद्र सिदार का नाम विज्ञान विषय पढ़ाने के लिए दर्ज नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि विज्ञान विषय के शिक्षक को अध्यापन व्यवस्था से बाहर रखकर कार्यालयीन कार्यों में लगाए जाने की व्यवस्था किसके निर्देश पर की गई है।

‘प्राचार्य की कृपा’ से बाबू बनने का आरोप

विद्यालय में चर्चा है कि सहायक शिक्षक विज्ञान एलबी महेंद्र सिदार को प्राचार्य जीएल चौहान की अनुमति अथवा सहमति से फीस, छात्रवृत्ति और अन्य कार्यालयीन कार्यों में लगाया जा रहा है। छात्रों के अनुसार इससे उनकी नियमित कक्षा संचालन में भूमिका दिखाई नहीं देती। हालांकि, महेंद्र सिदार को ये कार्यालयीन कार्य किस लिखित आदेश के तहत सौंपे गए हैं, यह स्पष्ट नहीं है। इस संबंध में विद्यालय प्रबंधन अथवा शिक्षा विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।

शासन का आदेश, लेकिन कक्षा में कौन पढ़ा रहा?

मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि स्कूल शिक्षा विभाग ने 9 सितंबर 2026 को प्रदेश के शासकीय हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्यों के पदकीय कार्यों एवं दायित्वों को लेकर निर्देश जारी किए हैं। आदेश में प्राचार्य को आवश्यकतानुसार प्रतिदिन कम से कम दो कालखंड अध्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, विद्यालय की समय-सारणी में प्राचार्य जीएल चौहान का नाम भौतिकी विषय के लिए एक कालखंड में दर्ज बताया जा रहा है। लेकिन छात्रों के अनुसार प्राचार्य लंबे समय से नियमित रूप से कक्षा नहीं ले रहे हैं।

शिक्षक पढ़ाएंगे या बाबू का काम करेंगे?

सहायक शिक्षक विज्ञान एलबी की नियुक्ति विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए हुई है। ऐसे में यदि वे नियमित अध्यापन के बजाय फीस और छात्रवृत्ति जैसे कार्यालयीन कार्यों में लगे हुए हैं, तो यह व्यवस्था विभागीय जांच का विषय बनती है। खासकर तब, जब विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषय की नियमित पढ़ाई की आवश्यकता होती है। सवाल यह भी है कि एक शिक्षक को कार्यालयीन जिम्मेदारी सौंपने के बाद उसकी कक्षाओं की भरपाई कौन कर रहा है?

अब निगाह शिक्षा विभाग की ओर है कि वह विद्यालय की समय-सारणी, वास्तविक कक्षा संचालन, महेंद्र सिदार को सौंपे गए कार्यालयीन कार्य और छात्रों द्वारा बताई जा रही स्थिति की जांच करता है या नहीं।

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