Welcome to CG khabarnama   Click to listen highlighted text! Welcome to CG khabarnama
छत्तीसगढ़टॉप न्यूज़देशराज्यलोकल न्यूज़

फर्जी अवकाश से खरीदी विवाद तक: उप संचालक पर शिकंजा कसता दिखा, फिर भी कार्रवाई का इंतजार

जांच रिपोर्ट के बाद भी चुप्पी, अब 50 ट्रायसायकल खरीदी में नियम उल्लंघन पर नोटिस

फर्जी अवकाश से खरीदी विवाद तक: उप संचालक पर शिकंजा कसता दिखा, फिर भी कार्रवाई का इंतजार

जांच रिपोर्ट के बाद भी चुप्पी, अब 50 ट्रायसायकल खरीदी में नियम उल्लंघन पर नोटिस

तीन दिन में जवाब तलब, बार-बार मामलों के उजागर होने से विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल

 

जांजगीर-चांपा। समाज कल्याण विभाग में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। 115 दिनों के कथित फर्जी अवकाश मामले में 27 अप्रैल 2026 को जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद भी जहां कार्रवाई लंबित है, वहीं अब एक और नया मामला सामने आया है। इस बार उप संचालक श्रीमती बरखा मिहिर को 50 मोटराइज्ड ट्रायसायकल खरीदी प्रक्रिया में नियम उल्लंघन के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

खरीदी प्रक्रिया पर उठा नया विवाद

कार्यालय कलेक्टर (समाज कल्याण), जांजगीर-चांपा द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि 22 अप्रैल 2026 को जेम पोर्टल के माध्यम से 50 मोटराइज्ड ट्रायसायकल की खरीदी हेतु निविदा आमंत्रित की गई। यह प्रक्रिया निर्धारित वित्तीय और प्रशासनिक प्रावधानों के विपरीत प्रतीत होती है। सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति के बिना इस प्रकार की खरीदी को गंभीर अनियमितता माना गया है।

नोटिस में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के उल्लंघन का उल्लेख करते हुए तीन दिवस के भीतर अनिवार्य रूप से स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

नियमों की अनदेखी या प्रशासनिक लापरवाही?

जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ शासन के प्रावधानों के तहत कलेक्टर स्तर पर अधिकतम 25 लाख रुपये तक की खरीदी की अनुमति है। इससे अधिक राशि के लिए उच्च स्तरीय स्वीकृति आवश्यक होती है। ऐसे में बिना सक्षम स्वीकृति के 50 ट्रायसायकल की खरीदी प्रक्रिया शुरू करना नियमों के सीधे उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है।

एक के बाद एक मामले, बढ़ती गंभीरता

गौरतलब है कि इससे पहले 115 दिनों के कथित फर्जी अवकाश स्वीकृति का मामला सामने आया, संचालक स्तर से दो बार पत्र जारी कर जांच रिपोर्ट मांगी गई। 27 अप्रैल को रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद भी कार्रवाई अब तक लंबित है। अब उसी अधिकारी के खिलाफ एक और नया मामला सामने आने से विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल और गहरे हो गए हैं।

जांच के बाद भी कार्रवाई नहीं, बढ़ते संदेह

फर्जी अवकाश मामले में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना पहले ही सवालों के घेरे में है। ऐसे में नए विवाद के सामने आने से यह धारणा और मजबूत हो रही है कि मामलों पर समयबद्ध कार्रवाई के बजाय केवल नोटिस और जांच तक सीमित रहने की प्रवृत्ति हावी है।

तबादलों के बाद क्या बदलेगा रुख?

हाल ही में छत्तीसगढ़ में हुए आईएएस अधिकारियों के फेरबदल के बाद अब इस पूरे प्रकरण पर नई नजरें टिकी हैं। अब यह देखना अहम होगा कि क्या नए पदस्थ अधिकारी सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई करेंगे या फिर पहले की तरह मामलों को लंबित रखकर टालने की स्थिति बनी रहेगी

निर्णायक मोड़ पर विभाग

फिलहाल, एक तरफ जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद कार्रवाई लंबित है, तो दूसरी ओर नया कारण बताओ नोटिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। अब विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि क्या वह इन मामलों में समयबद्ध और ठोस कार्रवाई कर जवाबदेही सुनिश्चित करेगा, या फिर यह पूरा मामला केवल फाइलों और नोटिसों तक ही सीमित रह जाएगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!