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115 दिन के फर्जी अवकाश मामला: जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद भी कार्रवाई ठप

27 अप्रैल को रिपोर्ट भेजी गई, फिर भी विभाग खामोश, कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

115 दिन के फर्जी अवकाश मामला: जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद भी कार्रवाई ठप

27 अप्रैल को रिपोर्ट भेजी गई, फिर भी विभाग खामोश, कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

आईएएस अधिकारियों के तबादले के बाद नजरें नई व्यवस्था पर, क्या होगी कार्रवाई या फिर दोहराएगा इतिहास खुद को?

जांजगीर-चांपा। समाज कल्याण विभाग में 115 दिनों के कथित फर्जी अवकाश स्वीकृति मामले में एक और महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 27 अप्रैल 2026 को जांच रिपोर्ट संबंधित प्राधिकरण को भेजी जा चुकी है, इसके बावजूद अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं होना विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

गौरतलब है कि इस मामले में संचालक, समाज कल्याण द्वारा 24 अप्रैल को कलेक्टर जांजगीर-चांपा को 7 दिवस के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। इसके पहले भी 9 अप्रैल को इसी प्रकार का पत्र जारी किया गया था। लगातार निर्देशों और स्मरण पत्रों के बाद आखिरकार जांच रिपोर्ट 27 अप्रैल को भेज दी गई, लेकिन उसके बाद की स्थिति पूरी तरह अस्पष्ट बनी हुई है।

रिपोर्ट के बाद भी सन्नाटा, सवालों के घेरे में विभाग

जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद सामान्यतः अपेक्षा की जाती है कि संबंधित अधिकारी के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की जाएगी। लेकिन इस मामले में रिपोर्ट प्रस्तुत होने के बाद भी अब तक कोई स्पष्ट निर्णय या दंडात्मक कदम सामने नहीं आया है। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या विभाग जानबूझकर कार्रवाई में देरी कर रहा है, या फिर मामला फिर से फाइलों में दबा दिया गया है?

“जांच पूरी, कार्रवाई अधूरी”, बढ़ता असंतोष

सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में पहले ही दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां और कूटरचना के संकेत सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद कार्रवाई न होना अब विभागीय निष्क्रियता या संभावित संरक्षण की आशंका को और मजबूत कर रहा है।
कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि यदि यही मामला किसी निम्न स्तर के कर्मचारी से जुड़ा होता, तो अब तक कठोर कार्रवाई सुनिश्चित हो चुकी होती।

तबादलों के बाद नई उम्मीद या पुरानी कहानी?

इधर, छत्तीसगढ़ में हाल ही में आईएएस अधिकारियों के फेरबदल के बाद इस मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है। अब निगाहें नई पदस्थापना वाले अधिकारियों पर टिकी हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या नए आईएएस अधिकारी निष्पक्षता के साथ त्वरित कार्रवाई करेंगे? या फिर यह मामला भी पूर्व की तरह लंबित रखकर टाल दिया जाएगा?

फैसला अब विभाग के हाथ में

फिलहाल, जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अब पूरा मामला निर्णायक चरण में है। विभागीय स्तर पर लिया गया अगला कदम ही यह तय करेगा कि प्रशासन पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में आगे बढ़ता है या फिर यह मामला भी केवल “जांच” तक सीमित रह जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए केवल जांच पर्याप्त है, या फिर समयबद्ध कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी है?

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