कलेक्ट्रेट जांजगीर में पार्किंग व्यवस्था बदहाल, कीचड़ और अव्यवस्था से जूझ रहे जिलेवासी
एक ओर वीआईपी वाहनों के लिए सुव्यवस्थित इंतजाम, दूसरी ओर आम लोगों और कर्मचारियों के लिए दलदली रास्ता बना परेशानी का सबब

कलेक्ट्रेट जांजगीर में पार्किंग व्यवस्था बदहाल, कीचड़ और अव्यवस्था से जूझ रहे जिलेवासी
एक ओर वीआईपी वाहनों के लिए सुव्यवस्थित इंतजाम, दूसरी ओर आम लोगों और कर्मचारियों के लिए दलदली रास्ता बना परेशानी का सबब
जांजगीर-चाम्पा। जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में इन दिनों वाहनों की आवाजाही और पार्किंग व्यवस्था पूरी तरह से अव्यवस्थित नजर आ रही है। जहां एक ओर कलेक्टर के वाहन के लिए सुचारू और व्यवस्थित पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है, वहीं दूसरी ओर अधीनस्थ कर्मचारियों और आम नागरिकों को कीचड़युक्त और दुर्गम मार्ग से होकर गुजरने को मजबूर होना पड़ रहा है।

कलेक्ट्रेट परिसर के एक हिस्से में स्थिति इतनी खराब है कि वहां से वाहनों का निकलना तक मुश्किल हो गया है। कार्यालय परिसर के बाहर तैनात सुरक्षा कर्मियों द्वारा अक्सर वाहनों को अंदर पार्किंग के लिए भेजा जाता है, लेकिन जैसे ही वाहन चालक अंदर प्रवेश करता है, उसे अव्यवस्था का वास्तविक दृश्य दिखाई देता है। प्रवेश के साथ ही बेतरतीब खड़ी मोटरसाइकिलें मार्ग को संकरा बना देती हैं, जिससे आगे बढ़ना कठिन हो जाता है।

इसके बाद जो रास्ता सामने आता है, वह पूरी तरह उबड़-खाबड़ और कीचड़ से भरा हुआ है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यहां फिसलने और गिरने का खतरा बना रहता है, जबकि चार पहिया वाहन चालकों को झटकों से गुजरना पड़ता है। स्थिति इतनी खराब है कि वाहन पार्क करने के बाद जब लोग नीचे उतरते हैं, तो उन्हें दलदली जमीन में कदम रखना पड़ता है, जो किसी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति से कम नहीं लगता।

कलेक्ट्रेट परिसर की यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है, जिससे कर्मचारियों और जिलेवासियों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक भवन के भीतर कार्यालयीन व्यवस्था सामान्य रूप से संचालित होती नजर आती है, जिससे बाहरी परिसर की वास्तविक स्थिति से अनभिज्ञता का अंदेशा भी जताया जा रहा है।

कलेक्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण शासकीय परिसर में इस प्रकार की अव्यवस्था न केवल आमजन के लिए असुविधा का कारण बन रही है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी प्रश्नचिह्न खड़े कर रही है। परिसर में बेहतर पार्किंग व्यवस्था और मार्ग सुधार की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है।




