साढ़े छह करोड़ के सौंदर्यीकरण के बाद भी बदहाल भीमा तालाब, मॉर्निंग वॉकर्स का फूटा गुस्सा
मृत कुत्ते, गोबर, कचरा और दुर्गंध से परेशान नागरिकों ने जताया आक्रोश, नगर पालिका व जिला प्रशासन के खिलाफ लगाए मुर्दाबाद के नारे

साढ़े छह करोड़ के सौंदर्यीकरण के बाद भी बदहाल भीमा तालाब, मॉर्निंग वॉकर्स का फूटा गुस्सा
मृत कुत्ते, गोबर, कचरा और दुर्गंध से परेशान नागरिकों ने जताया आक्रोश, नगर पालिका व जिला प्रशासन के खिलाफ लगाए मुर्दाबाद के नारे
जांजगीर। शहर के मध्य स्थित ऐतिहासिक और मनोरम भीमा तालाब की बदहाल स्थिति को लेकर मॉर्निंग वॉक करने वाले नागरिकों का आक्रोश बुधवार सुबह खुलकर सामने आया। तालाब परिसर में गंदगी, जगह-जगह गोबर, मृत कुत्ते और दुर्गंध से परेशान लोगों ने साफ-सफाई व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए नगर पालिका एवं जिला प्रशासन के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए। नागरिकों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर विकसित किए गए शहर के प्रमुख पर्यटन एवं सार्वजनिक स्थल की नियमित साफ-सफाई और देखरेख पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
मॉर्निंग वॉक करने पहुंचे नागरिकों ने बताया कि भीमा तालाब शहर की ऐतिहासिक पहचान होने के साथ ही प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों के सुबह-शाम घूमने का प्रमुख स्थान है। लेकिन वर्तमान में परिसर में जगह-जगह गंदगी और गोबर पड़ा हुआ है। कुछ स्थानों पर मृत कुत्ते भी पड़े दिखाई दिए, जिससे दुर्गंध फैल रही है। तालाब के आसपास की स्थिति से मॉर्निंग वॉकर्स और स्थानीय नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

तालाब में आ रहा शहर का गंदा पानी, दुर्गंध से बढ़ी परेशानी
मामले को लेकर विधायक व्यास कश्यप ने भी मौके की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भीमा तालाब के सौंदर्यीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन वर्तमान में नगर का गंदा पानी तालाब में आ रहा है, जिसके कारण पानी में दुर्गंध की समस्या बनी हुई है। विधायक ने बताया कि मॉर्निंग वॉक ग्रुप के लोगों ने बुधवार सुबह उन्हें इस समस्या से अवगत कराया।
विधायक ने कहा कि गंदे नाले के पानी को तालाब में आने से रोकने के लिए तत्काल व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि अक्टूबर तक चलने वाली नहर के पानी को इनलेट के माध्यम से तालाब में लाया जाए तथा तालाब में जमा गंदे पानी को आउटलेट के माध्यम से बाहर निकाला जाए। साथ ही सफाई के लिए ब्लीचिंग पाउडर, चूना, पोटाश आदि का उपयोग कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही।
विधायक ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि क्षेत्र में अफसरशाही लगभग पूरी तरह हावी है। उन्होंने तालाब की मौजूदा स्थिति में तत्काल सुधार की आवश्यकता बताई।
करोड़ों की लागत से विकसित हुआ था भीमा तालाब
भीमा तालाब के सौंदर्यीकरण एवं विकास के लिए लगभग 6 करोड़ 50 लाख रुपये का बजट प्रावधान किए जाने की जानकारी सामने आई है। जिला खनिज न्यास (DMFT) मद और सरोवर धरोहर योजना के तहत तालाब के जीर्णोद्धार एवं विकास कार्य कराए गए थे।
परियोजना के तहत लगभग 1.25 किलोमीटर लंबा परिक्रमा पथ एवं ग्रिल, आकर्षक प्रवेश द्वार, करीब पांच हजार दर्शकों की क्षमता वाला ओपन ऑडिटोरियम, चार व्यू प्वाइंट, चिल्ड्रन पार्क, ओपन जिम तथा बुजुर्गों के लिए ‘बापू की कुटिया’ जैसी सुविधाएं विकसित की गई थीं। इसके अलावा मोटर बोट एवं पैडल बोट, रंग-बिरंगी एलईडी लाइटिंग, दीवारों पर कलाकृतियां और ‘मोर जांजगीर’ सेल्फी प्वाइंट जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई थीं।

प्रशासन ने लिया संज्ञान, तहसीलदार ने किया स्थल निरीक्षण
मामले की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने भी इसे गंभीरता से लिया। मौके पर पहुंचे तहसीलदार शशि भूषण सोनी ने भीमा तालाब का निरीक्षण किया।
उन्होंने कहा कि जांजगीर शहर के मध्य स्थित भीमा तालाब एक मनोरम स्थल है, जहां लोगों का लगातार आना-जाना लगा रहता है। विधायक व्यास कश्यप द्वारा तालाब में बढ़ती गंदगी की समस्या को संज्ञान में लाए जाने के बाद कलेक्टर एवं एसडीएम के निर्देश पर उन्हें स्थल का अवलोकन करने भेजा गया है।
तहसीलदार ने कहा कि मौके पर जो स्थिति देखने को मिली है, उसका पूरा प्रतिवेदन तैयार कर शासन के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तालाब में मछली मारने की अनुमति नहीं है।

रखरखाव को लेकर नागरिकों ने उठाए सवाल
मॉर्निंग वॉकर्स का कहना है कि किसी सार्वजनिक स्थल को विकसित करने के बाद उसका नियमित रखरखाव भी उतना ही जरूरी है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई सुविधाएं तभी उपयोगी साबित होंगी, जब परिसर में नियमित साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, जल स्वच्छता और अन्य व्यवस्थाओं की निरंतर निगरानी हो।
नागरिकों ने प्रशासन से तालाब परिसर में तत्काल सफाई कराने, मृत पशुओं को हटाने, गोबर एवं कचरे की नियमित सफाई, गंदे नाले के पानी की आवक रोकने तथा तालाब के पानी की स्वच्छता के लिए आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
भीमा तालाब की मौजूदा स्थिति को लेकर उठी शिकायतों के बाद अब प्रशासनिक निरीक्षण और प्रतिवेदन के बाद क्या कार्रवाई होती है, इस पर नागरिकों की नजर है।




