देवरी-चिचोली में पिकनिक या मौत का खतरा? हसदेव में फिर गई तीन जानें
सात साल में 22 मौतों का आंकड़ा सामने आया, 2024 में सर्वाधिक पांच लोगों की गई जान; 2025 में चार और 2026 में अब तक तीन मौतें, लगातार हादसों के बीच सुरक्षा इंतजामों पर फिर उठे सवाल

देवरी-चिचोली में पिकनिक या मौत का खतरा? हसदेव में फिर गई तीन जानें
सात साल में 22 मौतों का आंकड़ा सामने आया, 2024 में सर्वाधिक पांच लोगों की गई जान; 2025 में चार और 2026 में अब तक तीन मौतें, लगातार हादसों के बीच सुरक्षा इंतजामों पर फिर उठे सवाल
जांजगीर-चांपा। हसदेव नदी के किनारे स्थित देवरी-चिचोली का पिकनिक स्पॉट एक बार फिर तीन परिवारों के लिए मातम का कारण बन गया। बिलासपुर के चौकसे कॉलेज से पिकनिक मनाने पहुंचे छात्रों के समूह में शामिल तीन युवकों की हसदेव नदी में बहने से मौत हो गई। हादसे के बाद एसडीआरएफ, नगर सेना और पुलिस की टीम ने रेस्क्यू अभियान चलाया। लगातार तलाश के बाद तीनों के शव बरामद किए गए। इस घटना के साथ ही देवरी-चिचोली में नदी में डूबने से होने वाली मौतों का सिलसिला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

उपलब्ध आंकड़ों और स्थानीय स्तर से प्राप्त जानकारी के अनुसार 2020 से 2026 तक सात वर्षों में देवरी-चिचोली पिकनिक स्पॉट पर पानी में डूबने से कुल 22 मौतों का आंकड़ा सामने आया है। इनमें वर्ष 2020 में 2, 2021 में 3, 2022 में 2, 2023 में 3, 2024 में 5, 2025 में 4 और 2026 में अब तक 3 मौतें दर्ज बताई गई हैं। यह आंकड़ा आर.के. यादव, कुदरी से प्राप्त जानकारी के आधार पर है।
सात साल में 22 मौतें, 2024 सबसे घातक
उपलब्ध वर्षवार आंकड़े बताते हैं कि देवरी-चिचोली में नदी में डूबने की घटनाएं किसी एक वर्ष तक सीमित नहीं रही हैं। वर्ष 2020 में दो, 2021 में तीन, 2022 में दो, 2023 में तीन, 2024 में पांच, 2025 में चार और 2026 में अब तक तीन लोगों की मौत का आंकड़ा सामने आया है।
वर्ष मौत
2020 02
2021 03
2022 02
2023 03
2024 05
2025 04
2026 03
———————-
योग – 22
———————-इस आंकड़े के अनुसार 2024 में पांच मौतों के साथ सबसे अधिक जानें गईं, जबकि 2025 में चार और 2026 में अब तक तीन मौतें सामने आ चुकी हैं। यानी पिछले तीन वर्षों में ही उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 12 लोगों की जान जा चुकी है।
2026 में तीन छात्रों की मौत से फिर पसरा मातम
ताजा हादसा सितंबर 2026 में सामने आया। बिलासपुर के चौकसे कॉलेज से छात्र-छात्राओं का समूह देवरी-चिचोली पिकनिक मनाने पहुंचा था। हसदेव नदी में नहाने और तैरने के दौरान तीन छात्र पानी के तेज बहाव की चपेट में आ गए।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, नगर सेना और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। नदी में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया गया। तलाश के दौरान ड्रोन की मदद भी ली गई। काफी मशक्कत के बाद पहले चिरमिरी निवासी पवन का शव बरामद हुआ। इसके बाद घटनास्थल से करीब 500 मीटर नीचे पानी में दो अन्य शव दिखाई दिए। एसडीआरएफ ने दोनों शवों को बाहर निकाला। मृतकों की पहचान पवन निवासी चिरमिरी, मुरारी साहू निवासी पंडरिया और सचिन निवासी अंबिकापुर के रूप में हुई। एक ही पिकनिक ग्रुप के तीन युवकों की मौत से क्षेत्र में शोक की स्थिति निर्मित हो गई।

2025 में भी चार मौतों ने झकझोरा था
वर्ष 2025 भी देवरी-चिचोली के लिए हादसों के लिहाज से बेहद दुखद रहा। मार्च में 22 वर्षीय समय पाण्डेय की हसदेव नदी में डूबने से मौत हुई थी। वह बिलासपुर में रहकर एलएलबी की पढ़ाई कर रहा था और दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने देवरी-चिचोली पहुंचा था। रेस्क्यू टीम ने काफी मशक्कत के बाद उसका शव बरामद किया था।
इसके बाद अक्टूबर 2025 में बिलासपुर से पिकनिक मनाने पहुंचे पांच युवक-युवतियों के समूह के साथ हादसा हुआ। नदी में नहाने के दौरान तीन लोग तेज बहाव में बह गए। हादसे में अंकुर कुशवाहा, आशीष भोई और स्वर्णरेखा ठाकुर की मौत हुई। स्वर्णरेखा का शव घटना के पांचवें दिन करीब 20 किलोमीटर दूर देवरहा के पास बरामद किया गया था। इस तरह उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक अकेले 2025 में चार लोगों की जान गई।
2024 में पांच मौतों का आंकड़ा
वर्ष 2024 में भी देवरी-चिचोली में डूबने की घटनाओं का सिलसिला थमा नहीं। उपलब्ध वर्षवार आंकड़े में इस वर्ष पांच मौतें दर्ज बताई गई हैं। 27 दिसंबर 2024 को पिकनिक मनाने पहुंचे दीपका के दो युवकों 24 वर्षीय अंशु सिंह और 19 वर्षीय सुमित सिंह की हसदेव नदी में डूबने से मौत हुई थी। दोनों पिकनिक के दौरान नदी में गए थे और गहरे पानी में चले जाने के बाद डूब गए।
2022 में दो छात्रों की गई थी जान
दिसंबर 2022 में आठ दोस्तों का समूह देवरी-चिचोली पिकनिक मनाने पहुंचा था। हसदेव नदी में नहाने के दौरान दो छात्र गहरे पानी में चले गए और लापता हो गए। बाद में रेस्क्यू टीम ने दोनों के शव बरामद किए थे। मृतकों की पहचान प्रांजल देवांगन और दिव्यांशु कटकवार के रूप में हुई थी।

सिर्फ हादसे नहीं, लगातार सामने आ रहा जोखिम
देवरी-चिचोली हसदेव नदी के किनारे स्थित क्षेत्र होने के कारण आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में लोग यहां पिकनिक मनाने पहुंचते हैं। खासकर बारिश और पिकनिक सीजन के दौरान नदी में पानी का बहाव बढ़ जाता है। नदी की गहराई, तेज बहाव और कुछ हिस्सों में भंवर जैसी स्थिति यहां आने वाले लोगों के लिए जोखिम बढ़ाती है।
इसके बावजूद नदी के संवेदनशील हिस्सों तक लोगों की पहुंच रोकना, खतरे वाले स्थानों की पहचान करना और वहां लगातार निगरानी रखना चुनौती बना हुआ है। हादसे के बाद रेस्क्यू टीमों को कई घंटे तक नदी में तलाश करनी पड़ती है और कई मामलों में शव काफी दूर जाकर बरामद होते हैं।
रेस्क्यू के बाद सवाल, हादसे से पहले रोकथाम कितनी?
ताजा हादसे में भी तीन छात्रों की तलाश के लिए एसडीआरएफ को नदी में उतरना पड़ा। अंधेरा होने के बाद अभियान रोकना पड़ा और सुबह दोबारा तलाश शुरू की गई। इस पूरी प्रक्रिया में यह बात सामने आती है कि दुर्घटना के बाद बचाव दल सक्रिय होता है, लेकिन उससे बड़ा सवाल दुर्घटना होने से पहले जोखिम वाले स्थानों पर प्रभावी रोकथाम का है।
लगातार मौतों के आंकड़े के बीच पिकनिक स्पॉट पर आने वाले लोगों को नदी के खतरनाक हिस्सों से दूर रखने के लिए पर्याप्त चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग, संवेदनशील स्थानों की स्पष्ट पहचान, निगरानी व्यवस्था और पिकनिक सीजन के दौरान बचाव दल की उपलब्धता महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हादसे रोकने के लिए नो-एंट्री जोन, बैरिकेडिंग और ‘नदी मित्र’ बनाने की तैयारी
लगातार हो रहे हादसों को लेकर जब उप पुलिस अधीक्षक से सवाल किया गया कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे, तो उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन और पुलिस टीम के माध्यम से देवरी-चिचोली के संवेदनशील क्षेत्र को नो-एंट्री जोन घोषित करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत यह स्पष्ट किया जाएगा कि नदी के किस हिस्से तक लोगों को जाने की अनुमति होगी और किस स्थान के बाद प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।
उप पुलिस अधीक्षक के अनुसार, खतरनाक और संवेदनशील स्थानों पर बैरिकेडिंग भी की जाएगी, ताकि पिकनिक मनाने आने वाले लोग गहरे पानी या जोखिम वाले हिस्सों तक न पहुंच सकें। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर ‘नदी मित्र’ बनाने की योजना भी है। इसमें आसपास के क्षेत्र के ऐसे युवाओं को जोड़ा जाएगा, जिन्हें तैराकी का अच्छा अनुभव है। ये नदी मित्र पिकनिक सीजन और भीड़ के समय नदी क्षेत्र में लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ जरूरत पड़ने पर बचाव कार्य में भी सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि नो-एंट्री क्षेत्र का निर्धारण, बैरिकेडिंग और स्थानीय युवाओं को नदी मित्र के रूप में जोड़ने जैसे उपायों के जरिए भविष्य में हादसों की रोकथाम सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

सात साल का आंकड़ा बता रहा हादसों की गंभीरता
देवरी-चिचोली में वर्ष 2020 से 2026 तक सामने आया 22 मौतों का आंकड़ा यह बताता है कि नदी में डूबने की घटनाएं लगातार होती रही हैं। वर्ष दर वर्ष मौतों का सिलसिला जारी रहने के बावजूद हर नई घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठते हैं।
ताजा हादसे में तीन छात्रों की मौत के बाद एक बार फिर यही सवाल सामने है कि देवरी-चिचोली को पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित करने और यहां आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बीच प्रशासनिक व्यवस्था किस तरह संतुलन बनाएगी। तीन युवाओं की मौत ने उनके परिवारों को गहरे दुख में छोड़ दिया है, वहीं सात वर्षों के उपलब्ध आंकड़ों में दर्ज 22 मौतें इस स्थल पर सुरक्षा उपायों को गंभीरता से लेने की जरूरत को रेखांकित करती हैं।




