टूटते रिश्तों को मिली नई राह, लोक अदालत में 5 दंपतियों ने फिर थामा एक-दूसरे का हाथ
परिवार न्यायालय में 36 प्रकरणों का हुआ निराकरण, महीनों की काउंसलिंग के बाद दूर हुए मतभेद; बच्चों के भविष्य को लेकर न्यायालय की समझाइश बनी अहम कड़ी

टूटते रिश्तों को मिली नई राह, लोक अदालत में 5 दंपतियों ने फिर थामा एक-दूसरे का हाथ
परिवार न्यायालय में 36 प्रकरणों का हुआ निराकरण, महीनों की काउंसलिंग के बाद दूर हुए मतभेद; बच्चों के भविष्य को लेकर न्यायालय की समझाइश बनी अहम कड़ी
जांजगीर। नेशनल लोक अदालत के अवसर पर परिवार न्यायालय जांजगीर में कानूनी प्रकरणों के निपटारे के साथ ही टूटते पारिवारिक रिश्तों को बचाने की सार्थक पहल देखने को मिली। 12 सितंबर को आयोजित लोक अदालत में परिवार न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत 36 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इनमें आपसी विवाद के चलते अलग रह रहे 5 दंपतियों ने काउंसलिंग के बाद अपने मतभेद समाप्त कर दोबारा साथ रहने का निर्णय लिया। न्यायालय परिसर में इन दंपतियों को मिठाई खिलाकर और एक-दूसरे को माला पहनाकर विदाई दी गई।

लोक अदालत में सुलह के जरिए विवाद समाप्त करने वाले दंपतियों में अकलतरा का एक दंपति विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। दोनों का विवाह वर्ष 2010 में हुआ था। वैवाहिक जीवन के दौरान आपसी विवाद और वैचारिक मतभेद बढ़ने के बाद दोनों के बीच दूरियां बढ़ गईं। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि एक ही छत के नीचे रहना मुश्किल हो गया। करीब 16 वर्ष बाद पति ने तलाक के लिए न्यायालय में मामला प्रस्तुत किया। दंपति के दो पुत्र हैं, जिनकी उम्र क्रमश: 15 और 14 वर्ष है।
मामले की सुनवाई के दौरान परिवार न्यायालय की अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश नीलिमा सिंह बघेल ने दंपति की परिस्थितियों को समझते हुए उनके बच्चों के भविष्य को भी ध्यान में रखा। न्यायालय की ओर से दोनों पक्षों को समझाइश दी गई और आपसी विवाद को बातचीत के माध्यम से समाप्त करने के लिए काउंसलिंग शुरू कराई गई।
इसके बाद कई महीनों तक दंपति की लगातार काउंसलिंग की गई। काउंसलिंग के दौरान दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित करने और पुराने मतभेदों को दूर करने का प्रयास किया गया। धीरे-धीरे दोनों के बीच समझ बनी और वैवाहिक विवाद को समाप्त करने पर सहमति बनी। अंततः नेशनल लोक अदालत के दिन दोनों ने अपने विवाद को समाप्त करते हुए दोबारा साथ रहने का निर्णय लिया।
इसी तरह परिवार न्यायालय के समक्ष लंबित अन्य मामलों में भी पक्षकारों के बीच सुलह और समझौते के प्रयास किए गए। काउंसलिंग के बाद कुल 5 दंपतियों ने अपने वैवाहिक विवाद समाप्त कर साथ रहने की सहमति दी। लोक अदालत के दौरान इन दंपतियों के लिए माहौल भावुक हो गया। न्यायालय परिसर में उन्हें मिठाई खिलाई गई तथा एक-दूसरे को माला पहनाकर साथ रहने के लिए विदा किया गया।
इस अवसर पर संबंधित पक्षकारों के साथ उनके अधिवक्ता और न्यायालयीन स्टाफ भी इस भावुक क्षण के गवाह बने। लंबे समय से चले आ रहे विवाद के बाद परिवारों के दोबारा एक साथ आने से न्यायालय परिसर में खुशी का माहौल रहा।
नेशनल लोक अदालत के माध्यम से 36 प्रकरणों का निराकरण होने के साथ ही परिवार न्यायालय में हुई काउंसलिंग ने यह भी दिखाया कि पारिवारिक विवादों में संवाद, समझाइश और आपसी सहमति के माध्यम से समाधान की राह निकाली जा सकती है। विशेषकर बच्चों वाले मामलों में परिवार को एकजुट रखने और उनके भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सुलह के प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।




