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तना छेदक और पत्ती मोड़क कीट पर कृषि विभाग की नजर, किसानों को समय रहते नियंत्रण की सलाह

धान की फसल में प्रारंभिक लक्षण दिखते ही अपनाएं आवश्यक उपाय, अत्यधिक उर्वरक और जलभराव से बचने की अपील

तना छेदक और पत्ती मोड़क कीट पर कृषि विभाग की नजर, किसानों को समय रहते नियंत्रण की सलाह

धान की फसल में प्रारंभिक लक्षण दिखते ही अपनाएं आवश्यक उपाय, अत्यधिक उर्वरक और जलभराव से बचने की अपील

 

जांजगीर-चांपा। जिले में धान की फसल में तना छेदक एवं पत्ती मोड़क कीट के प्रकोप की संभावना को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने और समय पर आवश्यक कीट नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी है। विभाग ने किसानों से खेतों का नियमित निरीक्षण करने तथा कीट प्रकोप के प्रारंभिक लक्षण दिखाई देने पर अनुशंसित उपाय करने की अपील की है।

उप संचालक कृषि ने बताया कि खेतों में अत्यधिक उर्वरकों के उपयोग और अधिक जलभराव की स्थिति में तना छेदक एवं पत्ती मोड़क कीट का प्रकोप बढ़ सकता है। ऐसे में किसानों को फसल की नियमित निगरानी के साथ संतुलित उर्वरक उपयोग एवं खेतों में जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

कृषि विभाग के अनुसार तना छेदक कीट के प्रकोप की प्रारंभिक अवस्था में धान के पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। पौधे के तने के निचले हिस्से में छेद दिखाई देने लगते हैं और मुख्य तना अंदर से खोखला हो जाता है। प्रकोप बढ़ने की स्थिति में धान की बालियां सफेद होकर पूरी तरह सूख सकती हैं।

तना छेदक कीट के नियंत्रण के लिए क्लोरोसाइपर, जिसमें क्लोरपाइरीफास 50 प्रतिशत एवं साइपरमेथ्रिन 5 प्रतिशत का मिश्रण है, का 50 मिलीलीटर प्रति स्प्रेयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

इसी प्रकार पत्ती मोड़क कीट, जिसे ग्रामीण अंचलों में ‘सांवा कीट’ के नाम से भी जाना जाता है, के प्रकोप में हरी इल्ली धान की पत्तियों को मोड़कर उनके भीतर छिप जाती है। इसके बाद पत्तियों के हरे भाग को खाकर सफेद एवं पारदर्शी धारियां छोड़ देती है, जो इस कीट के प्रकोप के प्रमुख लक्षण हैं।

पत्ती मोड़क कीट के नियंत्रण के लिए किसानों को क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी का 6 से 10 मिलीलीटर प्रति स्प्रेयर अथवा एमामेक्टिन बेंजोएट 5 प्रतिशत एसजी का 8 से 10 ग्राम प्रति स्प्रेयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

कृषि विभाग ने जिले के किसानों से अपील की है कि धान की फसल में तना छेदक अथवा पत्ती मोड़क कीट के प्रारंभिक लक्षण दिखाई देने पर समय रहते उचित नियंत्रण उपाय अपनाएं, ताकि फसल को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।

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