बिर्रा में 75 हजार के पटाखे जब्त, पुलिस के प्रेस नोट में ही 66 और 68 किलो का अंतर!
अवैध पटाखों पर कार्रवाई की जानकारी जारी, लेकिन जब्ती की मात्रा को लेकर दो अलग-अलग आंकड़े; प्रेस नोट की जानकारी ने खड़े किए सवाल

बिर्रा में 75 हजार के पटाखे जब्त, पुलिस के प्रेस नोट में ही 66 और 68 किलो का अंतर!
अवैध पटाखों पर कार्रवाई की जानकारी जारी, लेकिन जब्ती की मात्रा को लेकर दो अलग-अलग आंकड़े; प्रेस नोट की जानकारी ने खड़े किए सवाल
जांजगीर-चांपा। दीपावली से पहले अवैध पटाखों के भंडारण पर कार्रवाई करते हुए बिर्रा थाना पुलिस ने ग्राम बिर्रा निवासी रुपेश अग्रवाल के कब्जे से पटाखे जब्त किए हैं। पुलिस ने जब्त पटाखों की कीमत 75 हजार रुपये बताई है और आरोपी के विरुद्ध विस्फोटक अधिनियम, 1884 की धारा 9(ख) के तहत कार्रवाई की जानकारी दी है। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर जारी पुलिस प्रेस नोट में पटाखों की मात्रा को लेकर दो अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं, जिससे आधिकारिक जानकारी की सटीकता पर सवाल उठ रहे हैं।

एक ही प्रेस नोट में 66 किलो भी, 68 किलो भी!
पुलिस के प्रेस नोट की शुरुआती जानकारी में 66 किलोग्राम पटाखे जब्त करने का उल्लेख है, जबकि विवरण में आरोपी के कब्जे से 68 किलोग्राम पटाखे जब्त किए जाने की बात लिखी गई है। जब्ती की कीमत दोनों जगह 75 हजार रुपये बताई गई है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर पुलिस ने 66 किलोग्राम पटाखे जब्त किए हैं या 68 किलोग्राम? कार्रवाई के संबंध में जारी आधिकारिक प्रेस नोट में ही दो अलग-अलग आंकड़े दर्ज होने से सूचना की पुष्टि और स्पष्टता जरूरी हो गई है।

कार्रवाई की जानकारी सही, लेकिन आंकड़ों में स्पष्टता भी जरूरी
पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय, आईपीएस के निर्देशन में दीपावली के मद्देनजर अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में बिर्रा पुलिस ने यह कार्रवाई की। पटाखों की जब्ती और आरोपी के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जानकारी देना पुलिस की ओर से महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन प्रेस नोट में मात्रा को लेकर विरोधाभास रहने से खबर की तथ्यात्मक स्पष्टता प्रभावित होती है। आधिकारिक सूचना जारी करते समय आंकड़ों का मिलान और सत्यापन भी उतना ही आवश्यक है, ताकि आम लोगों तक सही जानकारी पहुंचे।
अब यह स्पष्ट होना बाकी है कि जब्त पटाखों की वास्तविक मात्रा 66 किलोग्राम थी या 68 किलोग्राम। पुलिस के प्रेस नोट में दर्ज इस अंतर को दूर कर सही आंकड़ा सार्वजनिक किया जाना जरूरी है।




