
नैला में मां दुर्गा के दर्शन की राह में जाम का ग्रहण, यातायात व्यवस्था बेपटरी!
भव्य पंडाल देखने उमड़ रही भीड़ के बीच एंबुलेंस तक फंसने का दावा, नेताजी चौक से नैला जाने वाले रहवासी परेशान; सवाल—आपातकाल में कौन संभालेगा मोर्चा?
जांजगीर-चांपा। नैला का श्री श्री दुर्गा उत्सव, मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा और आकर्षक पंडाल दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। नवरात्रि की तिथियां आगे बढ़ने के साथ दर्शनार्थियों की भीड़ भी बढ़ रही है, लेकिन इसी आस्था और उत्साह के बीच नगर की यातायात व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि भीड़ को नियंत्रित करने और वाहनों की आवाजाही सुचारू रखने के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने से सड़कों पर जाम की स्थिति बन रही है। इसका असर आम नागरिकों के साथ आपातकालीन सेवाओं पर भी पड़ने की बात सामने आ रही है।
एंबुलेंस भी जाम में फंसी, तो जिम्मेदारी किसकी?
सामने आए वीडियो में भीड़ के बीच एंबुलेंस के फंसे होने का दृश्य दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। यदि आपातकालीन वाहन को भीड़ से निकलने का रास्ता नहीं मिल पाता है, तो यह स्थिति मरीजों के लिए गंभीर परेशानी खड़ी कर सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने की संभावना पहले से रहती है, तो यातायात पुलिस द्वारा एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों के लिए निर्बाध रास्ते की व्यवस्था क्यों नहीं सुनिश्चित की जा रही है? हालांकि, एंबुलेंस कितनी देर फंसी रही और इस दौरान किसी मरीज को नुकसान हुआ या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
नेताजी चौक से नैला तक रहवासियों की बढ़ी परेशानी
यातायात अव्यवस्था का असर केवल पंडाल में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं है। नेताजी चौक से नैला की ओर रहने वाले लोगों को भी शाम के समय घर से निकलने और वापस लौटने में परेशानी होने की शिकायत है। स्थानीय मार्गों पर भीड़ और वाहनों के दबाव के कारण दोपहिया वाहन लेकर घर तक पहुंचना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि जिन लोगों को जरूरी काम से बाहर निकलना हो, वे अपने घर तक पहुंचने के लिए कौन-सा रास्ता अपनाएं? वाहन लेकर निकलने के बाद यदि घर के पास तक पहुंचने का रास्ता ही बाधित हो जाए, तो उनकी परेशानी का समाधान कौन करेगा?
बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति
जाम की स्थिति बुजुर्गों, दिव्यांगों और चलने-फिरने में असमर्थ लोगों के लिए और अधिक कठिन हो सकती है। जिन लोगों को नियमित काम, उपचार या अन्य आवश्यकताओं के लिए घर से बाहर निकलना पड़ता है, उनके लिए भीड़ के बीच रास्ता तलाशना आसान नहीं है। धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ स्थानीय निवासियों की सामान्य आवाजाही सुनिश्चित करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में यातायात प्रबंधन में इन वर्गों की जरूरतों को प्राथमिकता देना जरूरी है।
भव्य आयोजन के बीच यातायात पुलिस की परीक्षा
नैला का दुर्गा उत्सव अपनी भव्यता और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या के लिए जाना जाता है। ऐसे आयोजन में यातायात पुलिस के सामने भीड़ नियंत्रण, पार्किंग, पैदल श्रद्धालुओं की सुरक्षा और आपातकालीन वाहनों की आवाजाही बनाए रखने की चुनौती रहती है। लेकिन यदि मुख्य मार्गों पर जाम की स्थिति बनती है और स्थानीय लोगों को आवागमन में परेशानी होती है, तो यातायात प्रबंधन की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब जरूरत है कि यातायात पुलिस प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त बल तैनात करे, वाहनों के प्रवेश और निकास के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाए, पार्किंग स्थलों तक पहुंचने के मार्गों को व्यवस्थित करे और एंबुलेंस के लिए वैकल्पिक रास्ता व आपातकालीन कॉरिडोर सुनिश्चित करे। साथ ही, स्थानीय रहवासियों के आवागमन के लिए भी व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाए।
आस्था के आयोजन में अव्यवस्था नहीं, सुरक्षित व्यवस्था चाहिए। मां दुर्गा के दर्शन के लिए उमड़ रही भीड़ के बीच किसी अनहोनी की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सवाल केवल जाम लगने का नहीं, बल्कि यह है कि जरूरत के समय एंबुलेंस को रास्ता मिलेगा या नहीं और स्थानीय नागरिक अपने घर तक सुरक्षित पहुंच पाएंगे या नहीं। अब देखना होगा कि यातायात पुलिस और जिला प्रशासन इन समस्याओं को दूर करने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।




