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कलेक्टर के आदेश की खुली अवहेलना: 5 दिन बाद भी प्रभार नहीं, समाज कल्याण विभाग ठप

अपर कलेक्टर चार्ज लेने पहुंचीं, उप संचालक बिना सौंपे चली गईं, कार्यालय शाम को रहस्यमय तरीके से खुला

कलेक्टर के आदेश की खुली अवहेलना: 5 दिन बाद भी प्रभार नहीं, समाज कल्याण विभाग ठप

अपर कलेक्टर चार्ज लेने पहुंचीं, उप संचालक बिना सौंपे चली गईं, कार्यालय शाम को रहस्यमय तरीके से खुला

आदेश के बावजूद मुख्यालय से अनुपस्थित, विभागीय कामकाज प्रभावित, प्रशासनिक सख्ती पर उठे सवाल

 

जांजगीर-चांपा। समाज कल्याण विभाग में चल रहे विवाद के बीच अब एक और गंभीर स्थिति सामने आई है। कलेक्टर द्वारा 10 जून 2026 को उप संचालक श्रीमती बरखा मिहिर से प्रभार हटाकर अपर कलेक्टर डॉ. स्निग्धा तिवारी को सौंपने के स्पष्ट आदेश जारी किए गए थे, लेकिन आदेश के 5 दिन बीत जाने के बाद भी न तो विधिवत प्रभार सौंपा गया है और न ही विभागीय कार्य सामान्य हो पाए हैं।

चार्ज लेने पहुंचीं अपर कलेक्टर, पर नहीं हुआ हस्तांतरण

सूत्रों के अनुसार, 11 जून की सुबह लगभग 10:30 बजे अपर कलेक्टर डॉ. स्निग्धा तिवारी समाज कल्याण कार्यालय चार्ज लेने पहुंचीं। वे करीब आधे घंटे तक कार्यालय में मौजूद रहीं। इसी दौरान उप संचालक बरखा मिहिर कासु कुछ समय के लिए कार्यालय आईं, लेकिन प्रभार हस्तांतरण की बात शुरू होते ही बिना कोई औपचारिक चर्चा किए वहां से चली गईं। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपर कलेक्टर को प्रभार सौंपने की कोई प्रक्रिया पूरी नहीं की।

शाम को रहस्यमय गतिविधि, फिर से सवाल

इस घटनाक्रम के बीच एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उसी दिन शाम लगभग 7:15 बजे, जब अधिकांश अधिकारी-कर्मचारी कार्यालय से जा चुके थे, उप संचालक बरखा मिहिर कार्यालय पहुंचीं। वे करीब आधे घंटे तक अंदर रहीं और उसके बाद वहां से निकल गईं। इस दौरान उनके कार्यालय आने और वहां रुकने के कारणों को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

आदेश के बाद भी अनुपस्थिति, कामकाज प्रभावित

स्थिति यह है कि उप संचालक बिना अनुमति मुख्यालय से अनुपस्थित बताई जा रही हैं अगले दिन भी वे कार्यालय नहीं पहुंचीं। अब तक प्रभार हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इस कारण समाज कल्याण विभाग का कामकाज पूरी तरह प्रभावित हो गया है। विभागीय कार्यालय तक नियमित रूप से नहीं खुल पा रहा है, जिससे हितग्राहियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

लगातार विवादों के बीच नई स्थिति

गौरतलब है कि इससे पहले 115 दिनों के कथित फर्जी अवकाश का मामला जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद भी कार्रवाई लंबित रहना, 50 मोटराइज्ड ट्रायसायकल खरीदी में नियम उल्लंघन पर नोटिस जैसे कई मामले सामने आ चुके हैं। इन सबके बीच अब कलेक्टर के आदेश के पालन में देरी ने पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया है।

प्रशासनिक व्यवस्था पर नजर

वर्तमान स्थिति में विभाग बिना नियमित प्रभार के संचालित हो रहा है। अब निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि प्रभार हस्तांतरण कब तक सुनिश्चित किया जाएगा और आदेश की अवहेलना के मामले में क्या कार्रवाई की जाएगी

फिलहाल, यह पूरा घटनाक्रम समाज कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है।

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