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अंगारखार भ्रष्टाचार मामला: 7 दिन की जांच 6 माह में भी अधूरी, अब केवल वसूली नोटिस से सिमटी कार्रवाई

24 नवंबर 2025 को गठित जांच टीम की रिपोर्ट पर 9 जून 2026 को रिकवरी नोटिस, आपराधिक पहलुओं पर अब तक चुप्पी

अंगारखार भ्रष्टाचार मामला: 7 दिन की जांच 6 माह में भी अधूरी, अब केवल वसूली नोटिस से सिमटी कार्रवाई

24 नवंबर 2025 को गठित जांच टीम की रिपोर्ट पर 9 जून 2026 को रिकवरी नोटिस, आपराधिक पहलुओं पर अब तक चुप्पी

 

जांजगीर-चाम्पा : बलौदा विकासखंड के ग्राम पंचायत अंगारखार में सामने आए कथित भ्रष्टाचार के मामले में कार्रवाई की रफ्तार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। 24 नवंबर 2025 को जनपद पंचायत बलौदा द्वारा तीन सदस्यीय जांच दल गठित कर 7 दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन जांच प्रक्रिया लंबा समय लेने के बाद अब 9 जून 2026 को केवल वसूली नोटिस जारी किए जाने तक सीमित दिखाई दे रही है।

जारी स्मरण-पत्र के अनुसार, शौचालय निर्माण, पचरी निर्माण, पंप ऑपरेटर भुगतान एवं नाली सफाई जैसे कार्यों में अनियमितताओं के आधार पर कुल 2 लाख 24 हजार 500 रुपये की राशि वसूली योग्य बताई गई है। संबंधित सरपंच-सचिव को तीन दिवस के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

गौरतलब है कि इस पूरे प्रकरण में प्रारंभ से ही गंभीर आरोप सामने आते रहे हैं। आरोप है कि पंचायत की शासकीय राशि को सामान्य नागरिकों के खातों में ट्रांसफर कर बाद में फोन के माध्यम से वापस लिया गया। इस प्रकार की प्रक्रिया को लेकर इसे आपराधिक कृत्य मानने की मांग लगातार उठती रही है।

पूर्व में सामने आए मामलों में पचरी मरम्मत के नाम पर राशि निकालकर कार्य नहीं कराना, पंचायत निधि का कथित वितरण, स्कूल में हैंडपंप मरम्मत का बिल निकालना जबकि कार्य न होना, तथा शौचालय निर्माण की राशि का अन्य कार्यों में उपयोग जैसे कई बिंदु जांच में शामिल रहे हैं। इन सभी आरोपों के आधार पर जांच टीम गठित की गई थी।

हालांकि, जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद भी कार्रवाई केवल वित्तीय वसूली तक सीमित रहना कई सवालों को जन्म दे रहा है। जिस प्रकार शासकीय राशि के लेन-देन में अनियमितता और निजी खातों के उपयोग की बात सामने आई है, उस पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने या विस्तृत जांच के संबंध में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।

पूरे घटनाक्रम को देखते हुए कार्रवाई की धीमी गति को लेकर ‘सौ दिन चले अढ़ाई कोस’ जैसी स्थिति बनने की चर्चा है। वहीं, केवल वसूली की प्रक्रिया अपनाए जाने से यह प्रश्न भी उठ रहा है कि क्या इस मामले में आपराधिक पहलुओं की अनदेखी की जा रही है।

प्रकरण में यह भी चर्चा है कि शासकीय राशि के मनमाने उपयोग और पंचायत स्तर पर हुए कथित लेन-देन के बावजूद अब तक कठोर कार्रवाई नहीं होना कई प्रकार के संदेह को जन्म देता है। कुछ लोग इसे संबंधित व्यक्तियों को बचाने का प्रयास भी मान रहे हैं।

फिलहाल, प्रशासन की ओर से जारी नोटिस के बाद अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या मामला केवल वसूली तक सीमित रहेगा या फिर पूरे प्रकरण के आपराधिक पहलुओं की भी जांच कर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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