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कलेक्टर के आदेशों को ठेंगा! इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप पर खुलेआम गैलनों में डीजल भराई

चाम्पा मार्ग स्थित टीवीएस शो-रूम के सामने नियमों की अनदेखी

कलेक्टर के आदेशों को ठेंगा! इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप पर खुलेआम गैलनों में डीजल भराई

चाम्पा मार्ग स्थित टीवीएस शो-रूम के सामने नियमों की अनदेखी

कार्यालय से कुछ ही दूरी पर प्रशासनिक निर्देशों की उड़ रही धज्जियां

 

जांजगीर-चांपा। जिले में पेट्रोल-डीजल की बिक्री को लेकर जारी कड़े प्रशासनिक निर्देशों के बावजूद नियमों का पालन जमीनी स्तर पर होता नजर नहीं आ रहा है। ताजा मामला कलेक्टर कार्यालय मार्ग से चाम्पा जाने वाली सड़क पर स्थित टीवीएस शो-रूम के सामने इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप का है, जहां खुलेआम आदेशों की अनदेखी की जा रही है।

बताया जा रहा है कि इस पेट्रोल पंप पर वाहनों के अलावा बड़े-बड़े गैलनों और डिब्बों में डीजल भरा जा रहा है। बोरवेल मशीनों के साथ आने वाले वाहनों के अलावा अलग से कंटेनरों में ईंधन दिया जा रहा है, जो कलेक्टर द्वारा जारी आदेशों का सीधा उल्लंघन है। यहां रोजाना कृषि कार्यों में उपयोग होने वाले ट्रैक्टर और अन्य वाहन लंबी कतार में देखे जाते हैं।

स्पष्ट आदेश के बावजूद उल्लंघन जारी

कलेक्टर कार्यालय (खाद्य शाखा) द्वारा जारी आदेश में साफ तौर पर निर्देशित किया गया है कि पेट्रोल एवं डीजल की बिक्री केवल वाहनों में ही की जाए। डिब्बा, जेरिकेन या अन्य पात्रों में ईंधन देने पर प्रतिबंध लगाया गया है। विशेष परिस्थितियों में ही सक्षम अधिकारी के निर्देश पर ही इस प्रकार की आपूर्ति की अनुमति है।

इसके बावजूद शहर के व्यस्त मार्ग पर स्थित इस पेट्रोल पंप में नियमों का खुलेआम उल्लंघन देखा जा रहा है, जिससे प्रशासनिक सख्ती पर सवाल उठने लगे हैं।

बैठक में भी दिए गए थे सख्त निर्देश

ज्ञात हो कि 22 मई को कलेक्टर जन्मेजय महोबे की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में पेट्रोल-डीजल की सुचारू आपूर्ति को लेकर कन्ज्यूमर पंप संचालकों और आयल कंपनियों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। औद्योगिक और वाणिज्यिक उपयोग के लिए सीधे आयल कंपनी से ईंधन लेने की बात कही गई थी, ताकि आम जनता और किसानों को परेशानी न हो।

अब कार्रवाई पर टिकी निगाहें

ऐसे में सवाल यह उठता है कि कलेक्टर कार्यालय के नजदीक ही स्थित इस पेट्रोल पंप पर हो रहे नियम उल्लंघन पर प्रशासन क्या कदम उठाता है। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या फिर आदेश केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे।

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