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पामगढ़ में अवैध रेत खनन का खेल: करोड़ों के कारोबार पर उठे गंभीर सवाल

नदियों का सीना छलनी, कार्रवाई पर उठी उंगलियां, विधायक की भूमिका पर भी जनता के आरोप

पामगढ़ में अवैध रेत खनन का खेल: करोड़ों के कारोबार पर उठे गंभीर सवाल

नदियों का सीना छलनी, कार्रवाई पर उठी उंगलियां, विधायक की भूमिका पर भी जनता के आरोप

 

जांजगीर-चांपा। जिले के पामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में अवैध रेत खनन का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। क्षेत्र की नदियों और घाटों से दिन-रात हो रही रेत निकासी को लेकर जहां प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं अब स्थानीय लोगों द्वारा क्षेत्रीय विधायक की भूमिका और सक्रियता को लेकर भी आरोप लगाए जाने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार, कई घाटों में निर्धारित नियमों को दरकिनार करते हुए भारी मशीनों के जरिए रेत उत्खनन किए जाने की शिकायतें मिल रही हैं। रात के समय ट्रैक्टर और हाईवा वाहनों की लगातार आवाजाही से ग्रामीण क्षेत्रों में असुविधा बढ़ रही है। सड़कों की खराब हालत और बढ़ते दबाव को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन के कारण नदियों के प्राकृतिक स्वरूप पर असर पड़ रहा है और भूजल स्तर में गिरावट की आशंका बनी हुई है। इसके साथ ही भारी वाहनों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है। इन सभी परिस्थितियों के बीच कार्रवाई के अभाव को लेकर लोगों में असंतोष व्याप्त है।

इसी क्रम में क्षेत्रीय विधायक की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इतने बड़े स्तर पर अवैध खनन गतिविधियां बिना राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि स्तर पर सख्ती दिखाई जाए तो इस पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है, लेकिन वर्तमान स्थिति में अपेक्षित हस्तक्षेप नजर नहीं आ रहा है।

क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि रेत कारोबार से जुड़े मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई सीमित स्तर तक ही रह जाती है। समय-समय पर छोटे वाहनों पर कार्रवाई की खबरें सामने आती हैं, लेकिन बड़े स्तर पर संचालित नेटवर्क तक कार्रवाई नहीं पहुंच पाने की बात कही जा रही है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि अवैध रेत परिवहन के कारण गांवों की सड़कों की स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। पुल-पुलियों पर दबाव बढ़ने से भविष्य में क्षति की आशंका जताई जा रही है। धूल और भारी वाहनों के चलते आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

जनता के बीच अब प्रमुख रूप से यह सवाल उठ रहा है कि अवैध रेत खनन को रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम कब उठाए जाएंगे। साथ ही यह भी पूछा जा रहा है कि क्षेत्रीय विधायक द्वारा इस दिशा में अब तक क्या पहल की गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पामगढ़ क्षेत्र में अवैध रेत खनन का मुद्दा आने वाले समय में बड़ा जनमुद्दा बन सकता है। यदि इस पर पारदर्शी और कड़ी कार्रवाई नहीं होती है, तो जनआक्रोश और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

फिलहाल, सभी की नजर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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