लिखित आश्वासन के बावजूद शेष भू-विस्थापितों को रोजगार का इंतजार, जिलाधीश से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
मड़वा-तेन्दूभाठा के सहखातेदारों ने वर्षों पुरानी रोजगार समस्या के निराकरण की उठाई मांग, आंदोलन समाप्त कराने के दौरान हुए आश्वासन पर ठोस कार्रवाई की मांग

लिखित आश्वासन के बावजूद शेष भू-विस्थापितों को रोजगार का इंतजार, जिलाधीश से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
मड़वा-तेन्दूभाठा के सहखातेदारों ने वर्षों पुरानी रोजगार समस्या के निराकरण की उठाई मांग, आंदोलन समाप्त कराने के दौरान हुए आश्वासन पर ठोस कार्रवाई की मांग
जांजगीर-चांपा। मड़वा-तेन्दूभाठा क्षेत्र के शेष सहखातेदार भू-विस्थापितों ने अटल बिहारी वाजपेयी ताप विद्युत संयंत्र, मड़वा में रोजगार दिए जाने के संबंध में पूर्व में किए गए लिखित आश्वासन को लागू कराने की मांग को लेकर जिलाधीश के समक्ष ज्ञापन प्रस्तुत किया है। भू-विस्थापितों ने मामले को लंबे समय से लंबित बताते हुए जिलाधीश से तत्काल निर्णायक हस्तक्षेप कर ठोस एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया है कि मड़वा-तेन्दूभाठा के सहखातेदार भू-विस्थापितों को रोजगार प्रदान करने के संबंध में पूर्व में तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), जांजगीर, जांजगीर-चांपा विधायक तथा प्लांट प्रबंधन के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में लिखित एवं हस्ताक्षरित आश्वासन दिया गया था। भू-विस्थापितों के अनुसार, इसी आश्वासन के आधार पर लंबे समय से चल रहा आंदोलन और चक्का जाम समाप्त किया गया था।
भू-विस्थापितों ने जिलाधीश को सौंपे पत्र में कहा है कि लिखित आश्वासन दिए जाने के बावजूद अब तक शेष सहखातेदार भू-विस्थापितों के रोजगार के संबंध में कोई ठोस, प्रभावी और परिणामकारी कार्रवाई सामने नहीं आई है। उन्होंने इस संबंध में प्रशासन के समक्ष पूर्व में भी कई बार ज्ञापन और आवेदन प्रस्तुत किए जाने की जानकारी देते हुए लंबित समस्या के निराकरण की मांग दोहराई है।

आंदोलन समाप्त कराने के दौरान दिए आश्वासन के क्रियान्वयन की मांग
भू-विस्थापितों का कहना है कि जब किसी आंदोलन और चक्का जाम को समाप्त कराने के लिए प्रशासन, जनप्रतिनिधियों एवं परियोजना प्रबंधन की उपस्थिति में लिखित एवं हस्ताक्षरित आश्वासन दिया गया था, तो उसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। ज्ञापन में सवाल उठाया गया है कि आंदोलन समाप्त कराने के लिए दिए गए लिखित आश्वासन को लागू कराने के लिए अब तक प्रभावी पहल क्यों नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि वर्षों से रोजगार और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे शेष सहखातेदार भू-विस्थापितों को केवल आश्वासन देकर मामले को लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। भू-विस्थापितों ने स्पष्ट किया है कि यदि समस्या का शीघ्र निराकरण नहीं किया जाता है तो वे लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपने अधिकारों की लड़ाई को पुनः तेज करने के लिए बाध्य होंगे।
मामले को गंभीरता से लेकर निर्णायक कार्रवाई की मांग
जिलाधीश से की गई मांग में कहा गया है कि इस पत्र को सामान्य ज्ञापन के रूप में नहीं, बल्कि लंबे समय से लंबित भू-विस्थापितों की गंभीर समस्या के रूप में लिया जाए। शेष सहखातेदार भू-विस्थापितों को रोजगार के संबंध में पूर्व में दिए गए लिखित आश्वासन के क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक स्तर पर तत्काल हस्तक्षेप कर संबंधित पक्षों के साथ समन्वय स्थापित किया जाए।
भू-विस्थापितों ने मांग की है कि मामले में ठोस और प्रभावी कार्रवाई करते हुए शेष सहखातेदारों को रोजगार दिलाने की दिशा में शीघ्र निर्णय लिया जाए, ताकि वर्षों से लंबित इस समस्या का समाधान हो सके।




