शिकायत कर वापस लेने का सिलसिला, जिले में सक्रिय कथित शिकायत गिरोह पर उठे सवाल
निजी स्कूलों और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ लगातार शिकायतों के बाद वापसी के मामलों की जांच की मांग, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मचारियों की भूमिका पर भी संदेह

शिकायत कर वापस लेने का सिलसिला, जिले में सक्रिय कथित शिकायत गिरोह पर उठे सवाल
निजी स्कूलों और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ लगातार शिकायतों के बाद वापसी के मामलों की जांच की मांग, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मचारियों की भूमिका पर भी संदेह
जांजगीर-चांपा। जिले में निजी स्कूलों और कथित झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराने और बाद में उन्हीं शिकायतों को वापस लेने के मामलों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि जिले में एक ऐसा कथित समूह सक्रिय है, जिसके माध्यम से अलग-अलग संस्थानों के खिलाफ शिकायतें की जाती हैं और बाद में शिकायत वापस लेने का सिलसिला सामने आता है। शिकायत वापसी के पीछे कथित लेन-देन की चर्चा भी हो रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और कथित लेन-देन से संबंधित साक्ष्यों की जांच होना अभी बाकी है।
मामले में शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी संदेह जताया जा रहा है। आरोप है कि विभागीय स्तर पर मिलने वाले कथित सहयोग के कारण ऐसे शिकायतकर्ताओं का मनोबल बढ़ रहा है। हालांकि, संबंधित कर्मचारियों की संलिप्तता के संबंध में अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
एनोस स्कूल की शिकायत वापस लेने का आवेदन
हाल ही में बलौदा विकासखंड के पहरिया स्थित एनोस अंग्रेजी माध्यम स्कूल के संबंध में प्रस्तुत शिकायत को वापस लेने का आवेदन सामने आया है। उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार, शिकायतकर्ता ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी, बलौदा को संबोधित आवेदन में पूर्व में प्रस्तुत शिकायत को स्वेच्छा से वापस लेने की इच्छा जताई है। आवेदन में भविष्य में स्वयं अथवा अपने किसी कर्मचारी के माध्यम से स्कूल के संबंध में शिकायत प्रस्तुत नहीं करने की बात भी लिखी गई है।
इससे पहले संबंधित स्कूल के संबंध में दिए गए शिकायत आवेदन में विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों और अन्य व्यवस्थाओं की जांच कराने की मांग की गई थी। इसमें विद्यालय की मान्यता, शिक्षकों की योग्यता, उपस्थिति अभिलेख, विद्यार्थियों से संबंधित दस्तावेज, अग्नि सुरक्षा तथा शासन और शिक्षा विभाग के निर्धारित नियमों के पालन की जांच जैसे बिंदु शामिल थे।
एक ही संस्थान के संबंध में पहले शिकायत और बाद में उसे वापस लेने का आवेदन सामने आने के बाद पूरे मामले की परिस्थितियों की जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है। हालांकि, केवल शिकायत वापस लेने से किसी व्यक्ति या समूह द्वारा अवैध लेन-देन किए जाने की पुष्टि नहीं होती। इसके लिए संबंधित पक्षों के बयान, दस्तावेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच आवश्यक होगी।
कई निजी स्कूलों के नाम से शिकायतें
जिले में हाल के दिनों में अलग-अलग निजी शिक्षण संस्थानों के प्रधान पाठक अथवा संस्था प्रमुख के नाम से शिकायतें किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें प्रमुख रूप से निम्न संस्थानों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं—
1. न्यू ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल, कटौद।
2. राजर्षि छत्रपति उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सेमरा।
3. ब्राइट डे इंग्लिश मीडियम स्कूल, सिउड़, विकासखंड नवागढ़।
4. ब्राम्हणी इंग्लिश मीडियम स्कूल, गौद।
5. एनोस अंग्रेजी माध्यम स्कूल, पहरिया।इन संस्थानों के संबंध में प्राप्त शिकायतों की विषयवस्तु, उनकी वर्तमान स्थिति और संबंधित विभागों द्वारा की गई कार्रवाई का परीक्षण किया जाना आवश्यक है। शिकायतों में लगाए गए आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ शिकायतों की भी चर्चा
निजी स्कूलों के अलावा क्षेत्र में कथित झोलाछाप डॉक्टरों के विरुद्ध भी शिकायतें किए जाने की जानकारी सामने आई है। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों में शिकायत मिलने पर संबंधित अधिकारियों द्वारा चिकित्सकीय योग्यता, पंजीयन और उपचार संबंधी वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप जांच की जा सकती है।
यदि किसी शिकायत में अनियमितता की आशंका व्यक्त की गई है, तो उसकी जांच कर तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करना स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है। वहीं, शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत वापस लिए जाने की स्थिति में भी यह देखना जरूरी है कि मामला केवल व्यक्तिगत विवाद का है अथवा उसमें जनस्वास्थ्य से जुड़े गंभीर प्रश्न शामिल हैं।
शिकायत वापस होने से जांच की जिम्मेदारी खत्म नहीं
प्रशासनिक स्तर पर किसी शिकायत का वापस लिया जाना अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि शिकायत झूठी थी या उसके पीछे कोई अनुचित उद्देश्य था। इसी तरह, शिकायत वापस लेने के कारण किसी गंभीर अनियमितता की जांच स्वतः समाप्त हो जाना भी उचित नहीं माना जा सकता। संबंधित विभाग को शिकायत की प्रकृति, उपलब्ध साक्ष्यों और लागू नियमों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।
यदि किसी निजी स्कूल में मान्यता, शैक्षणिक व्यवस्था, अग्नि सुरक्षा या अन्य अनिवार्य मानकों के उल्लंघन की आशंका है, तो शिक्षा विभाग नियमानुसार जांच कर सकता है। इसी प्रकार, बिना वैध योग्यता या आवश्यक पंजीयन के चिकित्सा सेवाएं देने की शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग को तथ्यों का परीक्षण करना चाहिए।
यदि जांच में शिकायतकर्ता द्वारा जानबूझकर झूठे आरोप लगाने, अनुचित लाभ लेने के लिए दबाव बनाने अथवा किसी विभागीय कर्मचारी द्वारा अनुचित सहयोग किए जाने के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित कानूनों और सेवा नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
विभागीय जांच से स्पष्ट हो सकती है वास्तविक स्थिति
जिले में लगातार शिकायतें किए जाने और कुछ मामलों में शिकायत वापस लेने की परिस्थितियों को देखते हुए संबंधित विभागों के लिए शिकायतों का रिकॉर्ड, जांच प्रतिवेदन, कार्रवाई की स्थिति और शिकायत वापसी के कारणों का परीक्षण करना महत्वपूर्ण है। आवश्यकता पड़ने पर शिकायतकर्ता और संबंधित संस्थानों के संचालकों के बयान भी लिए जा सकते हैं।
इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि क्या सभी शिकायतें वास्तविक अनियमितताओं की जानकारी देने के उद्देश्य से की गई थीं, या कुछ मामलों में शिकायत दर्ज कराने और वापस लेने के पीछे कोई अन्य कारण था। इसका उत्तर केवल निष्पक्ष जांच और प्रमाणों के आधार पर ही मिल सकता है।
फिलहाल, सामने आए दस्तावेज और लगाए गए आरोप मामले की जांच की आवश्यकता की ओर संकेत करते हैं। संबंधित विभागों की ओर से विस्तृत जांच और आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही शिकायतों तथा उनकी वापसी के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।



